अवैध कॉलोनी पर चला बुलडोजर, लेकिन सवाल बरकरार: नुकसान किसका, मुनाफा किसका?

मनोज चौधरी

मथुरा। बल्देव रोड स्थित लक्ष्मीनगर क्षेत्र में विकसित की जा रही एक अनाधिकृत कॉलोनी में शुक्रवार को मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। प्राधिकरण ने कॉलोनी में बनी सड़कों, नालियों और भूखंडों की प्लिंथ को तोड़ते हुए इसे अवैध निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई बताया। लेकिन इस कार्रवाई के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अधिक नुकसान किसका हुआ और फायदा किसका?

प्राधिकरण के अनुसार उक्त भूमि पर लगभग 8000 वर्गमीटर क्षेत्र में बिना स्वीकृति भू-विभाजन किया गया था। इस संबंध में वर्ष 2024-25 में वाद दर्ज किया गया था तथा अप्रैल 2025 में ध्वस्तीकरण के आदेश भी पारित कर दिए गए थे। इसके बावजूद कॉलोनी में विकास कार्य जारी रहे और लोगों ने भूखंड खरीदकर निर्माण भी शुरू कर दिए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कोई भी कॉलोनी एक दिन में नहीं बसती। पहले भूमि का विभाजन होता है, फिर सड़कें और नालियां बनती हैं, भूखंडों की बिक्री होती है और उसके बाद मकान खड़े होते हैं। यदि प्रशासन ने प्रारंभिक स्तर पर ही सख्ती दिखाई होती तो न तो कॉलोनी विकसित होती और न ही लोग अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर यहां घर बनाते।

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अब स्थिति यह है कि बिल्डर अपना मुनाफा वसूल कर चुका है, जबकि वहां रहने वाले परिवार टूटी सड़कों, उखड़ी नालियों और गहरे गड्ढों के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं। ध्वस्तीकरण के बाद क्षेत्र में आवागमन भी प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर लोगों को अपने घरों तक पहुंचने के लिए क्षतिग्रस्त मार्गों से गुजरना पड़ रहा है।

जानकारों का मानना है कि अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक है कि ऐसी कॉलोनियों को प्रारंभिक चरण में ही विकसित होने से रोका जाए। वर्षों तक निर्माण कार्य चलते रहने के बाद जब बुलडोजर पहुंचता है तो उसका सबसे बड़ा दंश आम नागरिक को झेलना पड़ता है, जिसने कानूनी जटिलताओं की जानकारी के बिना अपना आशियाना बनाने का सपना देखा होता है।

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि अवैध कॉलोनियों के विरुद्ध अभियान आगे भी जारी रहेगा। हालांकि इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि अवैध निर्माणों की रोकथाम समय रहते क्यों नहीं हो पाती और आखिर हर बार इसकी कीमत आम नागरिकों को ही क्यों चुकानी पड़ती है।