मनोज चौधरी
आगरा। सिंडिकेट बैंक कॉलोनी, निर्भय नगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति का विषय प्रमुखता से उठाया गया। कथा व्यास पं. रमेश चंद्र शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का रसपूर्ण वर्णन करते हुए धर्म, संस्कृति और राष्ट्र चेतना का संदेश दिया।
कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए संकल्प एवं शपथ ग्रहण कराई। उन्होंने कहा कि मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को इतिहास में चार बार ध्वस्त किया गया। अंतिम बार मुगल शासक औरंगजेब ने मूल गर्भगृह को तोड़कर वहां मस्जिद का निर्माण कराया। उन्होंने दावा किया कि भगवान श्रीकृष्ण के विग्रहों को आगरा लाकर जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगाया गया था।
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महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मूल गर्भगृह स्थल पर मंदिर निर्माण तथा आगरा से भगवान के विग्रहों को वापस लाने की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में दो वाद दायर किए गए हैं। इसके लिए देश-विदेश की विभिन्न लाइब्रेरी से ऐतिहासिक दस्तावेज और पुस्तकें एकत्र कर साक्ष्य जुटाए गए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि न्यायालय में उनकी जीत सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि मुकदमे वापस लेने के लिए उन्हें धमकियां भी मिलीं, लेकिन आंदोलन किसी भी दबाव में रुकने वाला नहीं है।
इस अवसर पर चिंतामणि कुंज के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर डॉ. आदित्यानंद जी महाराज ने संस्कारयुक्त शिक्षा पर बल देते हुए सनातन धर्म की गौरवशाली परंपराओं का उल्लेख किया। उन्होंने समाज से संगठित होकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के बैनर तले चल रहे आंदोलन में सहभागिता करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में वृंदावन के ब्रज सेवक संत श्यामानंद जी महाराज भी उपस्थित रहे। इससे पूर्व आयोजकों ने महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट, महामंडलेश्वर डॉ. आदित्यानंद जी महाराज तथा संत श्यामानंद जी महाराज का पुष्पमालाएं और दुपट्टा ओढ़ाकर स्वागत एवं सम्मान किया।
कथा आयोजन के मुख्य यजमान प्रो. हरि मोहन एवं श्रीमती आशा मोहन रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. सुमित मोहन, श्रीमती किरण शर्मा, अनंत, आदित्य तथा डॉ. माला वर्मा का विशेष सहयोग रहा। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया।








