बाल श्रम के खिलाफ एक संवेदनशील पुकार
— सतीश चंद्र शर्मा
सदस्य, जिला बाल श्रम उन्मूलन समिति, मथुरा
सुबह की पहली किरण के साथ जब अधिकांश बच्चे स्कूल की तैयारी में जुटे होते हैं, तब कुछ मासूम हाथ चाय की केतली उठाने, बर्तन मांजने, ईंट ढोने या कूड़ा बीनने के लिए निकल पड़ते हैं। जिन कंधों पर बस्ते होने चाहिए, वहां जिम्मेदारियों का बोझ लदा होता है। जिन आंखों में सपने होने चाहिए, उनमें संघर्ष की थकान दिखाई देती है।

यह केवल एक बच्चे की कहानी नहीं, बल्कि हमारे समाज की एक ऐसी सच्चाई है, जो आज भी लाखों बच्चों का बचपन निगल रही है।
बचपन जीवन की वह अवस्था है, जहां खेल, शिक्षा, जिज्ञासा और कल्पनाएं जन्म लेती हैं। लेकिन जब यही बचपन मजदूरी की भट्टी में झोंक दिया जाता है, तब न केवल एक बच्चे के सपने टूटते हैं, बल्कि राष्ट्र का भविष्य भी कमजोर पड़ जाता है। ढाबों, होटलों, कारखानों, दुकानों और सड़कों पर काम करते बच्चे हमें रोज दिखाई देते हैं, लेकिन अक्सर हम उन्हें देखकर भी अनदेखा कर देते हैं।
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मजदूरी का सबसे बड़ा कारण गरीबी और अशिक्षा है। आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवार कभी-कभी मजबूरी में बच्चों को स्कूल की बजाय काम पर भेज देते हैं। परिणाम यह होता है कि बच्चा शिक्षा से दूर हो जाता है और गरीबी का वही चक्र उसके जीवन में भी जारी रहता है, जिससे उसके माता-पिता जूझते रहे।
बाल श्रम केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनहीनता का भी प्रतीक है। कम उम्र में कठिन श्रम बच्चों के स्वास्थ्य, मानसिक विकास और आत्मविश्वास को प्रभावित करता है। कई बच्चे शोषण, हिंसा और अपराध के वातावरण में पहुंच जाते हैं, जहां उनका बचपन हमेशा के लिए खो जाता है।
सरकार ने बाल श्रम रोकने और बच्चों को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए कई कानून बनाए हैं। लेकिन किसी भी कानून की सफलता केवल सरकारी प्रयासों पर निर्भर नहीं करती। जब तक समाज का प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
जरूरत इस बात की है कि हम बाल मजदूरी को केवल एक सामाजिक समस्या न मानें, बल्कि इसे मानवता के विरुद्ध अपराध के रूप में देखें। यदि किसी दुकान, होटल, फैक्ट्री या अन्य स्थान पर कोई बच्चा काम करता दिखाई दे, तो हमें उसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। उसकी शिक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आगे आना चाहिए।
हर बच्चा एक संभावना है, एक भविष्य है, एक सपना है। यदि उसे उचित शिक्षा, संरक्षण और अवसर मिलें, तो वही बच्चा कल देश का वैज्ञानिक, शिक्षक, चिकित्सक, अधिकारी या समाज सुधारक बन सकता है।
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर आइए हम सभी यह संकल्प लें कि न किसी बच्चे से मजदूरी कराएंगे, न उसे बढ़ावा देंगे और न ही बाल श्रम देखकर मौन रहेंगे। हमारा छोटा-सा प्रयास किसी बच्चे के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।
याद रखिए—
“नन्हें हाथों में औजार नहीं, किताबें और सपने होने चाहिए। क्योंकि बचपन मजदूरी के लिए नहीं, भविष्य गढ़ने के लिए होता है।








