ब्रज के वनों, कुंडों और गिरिराज पर्वतीय क्षेत्र के संरक्षण एवं विकास को ब्रज तीर्थ विकास परिषद-हार्टफुलनेस मिलकर करेंगे कार्य

रामकुमार रौतेला

ईको-रेस्टोरेशन, जल संरक्षण और हरियाली बढ़ाने पर बनी सहमति, आठ प्रमुख बिंदुओं पर बनेगी संयुक्त कार्ययोजना

मथुरा। ब्रज के पौराणिक वनों, कुंडों तथा गिरिराज परिक्रमा क्षेत्र के संरक्षण एवं विकास को लेकर उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद एवं हार्टफुलनेस फाउंडेशन के बीच महत्वपूर्ण पहल हुई है। स्थलीय भ्रमण के साथ मंगलवार को दोनों संस्थाओं के बीच बैठक आयोजित की गई। इसमें ईको-रेस्टोरेशन, जल संरक्षण, हरित विकास तथा ब्रज की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा की गई।

बैठक से पूर्व हार्टफुलनेस फाउंडेशन के मार्गदर्शक एवं पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. कमलेश डी. पटेल (दाजी) ने परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र, मंडलायुक्त आगरा नगेंद्र प्रताप, जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह,

मुख्य कार्यपालक अधिकारी लक्ष्मी नागप्पन, प्रभागीय निदेशक वन वेंकटेश एस पटेल के साथ गोवर्धन क्षेत्र का भ्रमण किया। इस दौरान गिरिराज पर्वत की हरियाली, परिक्रमा मार्ग तथा विभिन्न पौराणिक कुंडों का अवलोकन किया गया। श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुगम एवं पर्यावरण-अनुकूल परिक्रमा व्यवस्था विकसित करने पर भी विचार-विमर्श हुआ।

इसके उपरांत परिषद सभागार में आयोजित बैठक में परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने कहा कि हार्टफुलनेस फाउंडेशन अब भगवान श्रीकृष्ण जा जन्म और लीला भूमि ब्रज में परिषद के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण और विकास कार्यों में सहभागी बनेगा। उन्होंने बताया कि संस्था भारत सहित अनेक देशों में सक्रिय है तथा उसके अनुभव और संसाधनों का लाभ ब्रज क्षेत्र को मिलेगा।

परिषद के ईको-रेस्टोरेशन प्रभारी मुकेश शर्मा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि फाउंडेशन के सहयोग से आठ प्रमुख बिंदुओं पर संयुक्त कार्ययोजना प्रस्तावित की है। ब्रज क्षेत्र में 746 विरासत स्थल, 231 कुंड और 137 पौराणिक वन चिन्हित हैं। परिषद द्वारा अब तक 165 परियोजनाएं प्रारंभ की जा चुकी हैं, जिनमें से 115 पूर्ण हो चुकी हैं।

मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप ने कहा कि जनपद में लगभग दो हजार तालाब, पोखर एवं अन्य जलाशय हैं। इनके संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए कौशल विकास तथा तकनीकी प्रशिक्षण आवश्यक है। साथ ही जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए वाटर म्यूजियम स्थापित करने की योजना पर भी चर्चा की गई। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने प्रस्तावित योजनाओं के तेजी से अमल में लाने के लिए जिला प्रशासन के हर सम्भव सहयोग का भरोसा दिया।

इसी अवसर पर हार्टफुलनेस के वैश्विक मार्गदर्शक दाजी (पद्म भूषण डॉ. कमलेश डी. पटेल) ने कहा कि हार्टफुलनेस संस्था पर्यावरण संरक्षण, ध्यान, शिक्षा एवं आत्म-विकास के क्षेत्रों में कार्य कर रही है। ब्रज क्षेत्र में भी जल संरक्षण एवं शोधन, वन पुनर्जीवन (ईको-रेस्टोरेशन) तथा ध्यान के प्रसार के लिए संस्था विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ लोगों के जीवन में आंतरिक शांति, संतुलन और सकारात्मकता का विकास भी उतना ही आवश्यक है। ब्रज की आध्यात्मिक एवं प्राकृतिक विरासत के संरक्षण हेतु परिषद के साथ मिलकर दीर्घकालिक कार्य किए जाएंगे।

बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार, नगर आयुक्त जग प्रवेश, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. पूजा गुप्ता, उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश चंद्र तथा हार्टफुलनेस फाउंडेशन की टीम के सदस्य उपस्थित रहे। अंत में मुख्य कार्यपालक अधिकारी लक्ष्मी नागप्पन ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

 

इन बिंदुओं पर बनी सहमति…

गिरिराज क्षेत्र में व्यापक स्तर पर हरियाली बढ़ाने एवं ईको-रेस्टोरेशन का कार्य।

गोविंद कुंड, गंधर्व कुंड, सुरभि कुंड एवं नारद कुंड के जल शोधन और रखरखाव की व्यवस्था।

टाटा समूह के सहयोग से राधाकुंड, श्यामकुंड, जतीपुरा कुंड एवं अष्टसखी कुंड का जल शोधन, रखरखाव एवं सौंदर्यीकरण।

उद्धव क्यारी कुंड एवं दोमिल कुंड के जल शोधन तथा सौंदर्यीकरण का कार्य।

टेंटीगांव स्थित जाकवारी मंदिर तालाब को आदर्श कुंड के रूप में विकसित करना।

वंशीवट, करहला-छाहरी सहित पौराणिक वनों के पुनर्जीवन एवं संरक्षण की योजना।

अकबरपुर एवं बरसाना में टीएफसी (टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर) का संचालन।

ब्रज क्षेत्र में वाटर म्यूजियम से

जल संरक्षण, जल संबंधी कौशल विकास एवं तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करना।