बंशीधर अग्रवाल मथुरा
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मथुरा, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जाने-माने पर्यावरणविद्, गहवर वन बचाओ आंदोलन के प्रणेता एवं योगाचार्य बंशीधर अग्रवाल ने पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन का अनूठा संदेश दिया। उन्होंने अपने परिवार एवं साथियों के साथ सूख रहे वृक्षों को कैन, पाइप और बाल्टी के माध्यम से नियमित रूप से पानी देकर लोगों को प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर उनके साथ श्रीमती रानी अग्रवाल, पूजा अग्रवाल, निका अग्रवाल, शोभा एवं सुमित अग्रवाल सहित अन्य परिजन उपस्थित रहे। सभी ने भीषण गर्मी के बीच सूख रहे वृक्षों को पानी देकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
बंशीधर अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। ऐसे समय में वृक्षों को पानी देना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि वृक्ष ही मानव जीवन के लिए प्राणवायु का स्रोत हैं। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जून माह के दौरान अपने आसपास के सूखते वृक्षों को नियमित रूप से पानी दें। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य है, बल्कि पुण्य का भी कार्य है।
उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु के आगमन पर प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक वृक्ष अवश्य लगाए और उसे बच्चे की तरह दो वर्षों तक संरक्षित करे। यदि देश की 150 करोड़ आबादी एक-एक वृक्ष लगाकर उसका पालन-पोषण करे तो पर्यावरण संबंधी अनेक समस्याओं का समाधान हो सकता है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पक्षियों की प्यास बुझाने की पहल पर जोर देते हुए अग्रवाल ने कहा कि वे स्वयं पेड़ों पर रस्सी से छींके बनाकर मिट्टी के बर्तनों में प्रतिदिन पानी भरते हैं। उन्होंने नागरिकों से भी अपने घरों, छतों और पेड़ों पर मिट्टी के पात्र रखकर पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि एक वृक्ष लगाकर उसका बच्चों की तरह पालन-पोषण करना सौ पुत्रों के समान पुण्यदायी कार्य है। जुलाई माह में ऐसे स्थानों पर वृक्षारोपण किया जाना चाहिए जहां पर्याप्त जल उपलब्ध हो तथा उनकी नियमित देखभाल संभव हो। यदि नया पौधा लगाने की व्यवस्था न हो सके तो आसपास लगे उन वृक्षों को पानी अवश्य दें जो गर्मी के कारण सूखने की स्थिति में हैं।
अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान समय में वृक्षों और पक्षियों की सेवा करना सबसे बड़ा पुण्य कार्य है तथा प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान में अपनी सहभागिता निभानी चाहिए।







