पटवारी पड़ रहे अफसरों पर भारी

 

वरिष्ठ पत्रकार, दिलीप यादव

———————————–

गोवर्धन तहसील में बंटवारे के 91 मामलों में सालों से दाखिल नहीं किए कुरेजात

-सभी मुकदमों मैं हो चुके हैं प्रारंभिक आदेश

-शासकीय कार्यों के प्रति गंभीर लापरवाही में एसडीएम को लिखा

 

मथुरा। गोवर्धन तहसील के पटवारी अधिकारियों को भी गंभीरता से नहीं ले रहे। आम किसानों की समस्याओं के मामले में तो उनके कहने ही क्या। एसडीएम न्यायिक की कोर्ट में विचाराधीन करीब 300 मामलों में 91 केवल पटवारियों की लापरवाही से अटके हुए हैं। प्रारंभिक डिग्री बनने के बाद सालों से केवल कुरेजात दाखिल करने के चलते इतने मुकदमे अटके हैं। भाई-भाई के बंटवारे के आधे से ज्यादा बाद कुरे दाखिल होते ही निपट जाएंगे। एडीएम जे ने एसडीएम गोवर्धन को लेखपालों द्वारा शासकीय कार्यों के प्रति गंभीर लापरवाही, शिथिलता एवं अरुचि का द्योतक बताते हुए द्वितीय अनुस्मारक भेजा है।

उल्लेखनीय है कि धारा 116 में आपसी शामिल खाते की एवं बेची गई जमीन के बंटवारे के मुकदमे चलते हैं। प्रारंभिक डिग्री बनने के बाद लेखपालों को अच्छे और खराब दोनों श्रेणियों की जमीन में बंटाईदारों का हिस्सा निर्धारित करना होता है। बंटवारे में यह भी ध्यान रखना होता है कि जमीन के अंश निर्धारण से कोई कास्तकार चकरोड या सिंचाई की नाली आदि से वंचित न रह जाए। कुरे दाखिल करने के बाद भी सभी काश्तकारों का सहमत होना आवश्यक है।

कानूनी प्रक्रिया में कुरे दाखिल होने के बाद काफी मामलों का निपटारा हो जाता है।

एसडीएम न्यायिक ने 26 मई को द्वितीय अनुस्मारक भेजा है। यानी कयी माह से उनके आदेशों को नजरंदाज किया जा रहा है।

इन मुकदमों में कयी 2019 और 22 के भी हैं। विदित हो कुरे दाखिल करने में भी पटवारी किसानों के साथ खेल करते हैं। इनमें बरसाना, जमुनावता, रसूलपुर, डहरौली के आदि के केस प्रमुख हैं। कुल केसों की बात करें तो बरसाना एवं आन्योर के 8-8, अड़ींग के 5, बछगांव 4, कमई 5, रसूलपुर 5, राधा कुण्ड 4, मगोर्रा 4 सहित कुल 91 केस पेंडिंग कर रखे हैं।