वरिष्ठ पत्रकार : दिलीप यादव
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मथुरा।
एक ओर सरकार और कृषि वैज्ञानिक पानी बचाने वाली खेती को बढ़ावा देने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र में किसान खाद की कमी से जूझ रहे हैं। धान की सीधी बिजाई यानी डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक तेजी से किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही है, लेकिन खाद संकट इस नई खेती पद्धति की रफ्तार रोकता नजर आ रहा है।
अड़ींग क्षेत्र में किसानों ने इस बार बड़े स्तर पर डीएसआर तकनीक अपनाने की तैयारी की है। गांव में पांच आधुनिक मशीनें भी पहुंच चुकी हैं। यह तकनीक पारंपरिक धान रोपाई की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत तक मजदूरी खर्च कम करती है और पानी की भारी बचत भी होती है। बढ़ती मजदूरी दर और गिरते जलस्तर के बीच किसान इसे भविष्य की खेती मान रहे हैं।
लेकिन विडंबना यह है कि करीब 52 हजार एकड़ क्षेत्रफल वाली अड़ींग सोसायटी में किसानों को खाद तक उपलब्ध नहीं हो पा रही। किसान खाद के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। ऐसे समय में जब धान की बुवाई की तैयारी शुरू हो चुकी है, खाद की कमी किसानों की चिंता बढ़ा रही है।

गत वर्ष एक सोच फाउंडेशन के सहयोग से ICAR-Indian Agricultural Research Institute यानी पूसा संस्थान दिल्ली ने किसानों को 1985 किस्म का करीब 10 क्विंटल धान बीज निशुल्क उपलब्ध कराया था। हालांकि उस समय डीएसआर मशीन समय पर नहीं मिल पाने से बहुत कम किसान सही तरीके से सीधी बिजाई कर सके थे। लेकिन जिन किसानों की फसल सफल रही, उन्होंने इस तकनीक को लेकर गांव में नई उम्मीद पैदा कर दी।
इस बार कृषि विभाग भी किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए चयनित किसानों को बीज उपलब्ध कराने की तैयारी में है। कृषि सलाहकार दिलीप कुमार यादव का कहना है कि कई वर्षों से किसानों को इस दिशा में प्रेरित किया जा रहा था, लेकिन अब आधुनिक मशीनों की उपलब्धता से किसानों का भरोसा बढ़ा है।
उधर Krishi Vigyan Kendra के प्रभारी वाई.के. शर्मा ने किसानों को सलाह दी है कि अत्यधिक तापमान को देखते हुए जल्दबाजी में बुवाई न करें। जून के पहले सप्ताह में तापमान सामान्य होने के बाद ही सीधी बिजाई करना बेहतर रहेगा।
जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार ने माना कि खाद की समस्या गंभीर है। उन्होंने कहा कि उच्च अधिकारियों से वार्ता कर अड़ींग क्षेत्र के किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
गांवों में अब चर्चा इस बात की है कि यदि सरकार पानी बचाने वाली तकनीकों को बढ़ावा देना चाहती है तो किसानों को समय पर खाद, बीज और मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। वरना खेती का नया मॉडल शुरू होने से पहले ही संकट में पड़ सकता है।






