मनोज चौधरी, 22 दिसंबर 2025। मथुरा
हादसे के बाद सख्ती, अब जिम्मेदारी तय होगी’
यमुना एक्सप्रेस-वे पर हालिया दर्दनाक हादसे में 13 लोगों की मौत और अन्य मार्गों पर एक दर्जन से अधिक जानें जाने के बाद प्रशासन की नींद टूटी है। बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और घने कोहरे को देखते हुए अब लापरवाही पर सीधी कार्रवाई का ऐलान किया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद मथुरा में परिवहन, पुलिस और लोक निर्माण विभाग को संयुक्त रूप से सख्त कदम उठाने के आदेश दिए गए हैं।
अब सड़क पर वही वाहन उतरेंगे जो पूरी तरह फिट होंगे। व्यावसायिक वाहनों की मानक के अनुरूप फिटनेस, ट्रैक्टर-ट्रॉली पर रेडियम पट्टी और सभी स्कूली वाहनों की 31 दिसंबर 2025 तक फिटनेस अनिवार्य कर दी गई है। आदेश साफ है—जो वाहन मानकों पर खरा नहीं उतरेगा, वह सड़क पर नहीं चलेगा।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) राजेश राजपूत ने जनपद के सभी विद्यालय प्रबंधकों, प्रधानाचार्यों और व्यावसायिक वाहन स्वामियों को चेतावनी दी है कि जिन वाहनों की फिटनेस समाप्त हो चुकी है, वे इस माह के अंत तक हेडलाइट, बैकलाइट, ब्रेक, क्लच, वाइपर, रेडियम पट्टी, खिड़की-दरवाजे और आपातकालीन द्वार समेत सभी जरूरी मानकों को पूरा कराएं। संचालन योग्य न होने वाले वाहनों को सड़क पर उतारने पर भारी जुर्माना तय किया गया है।
स्कूली वाहनों को लेकर प्रशासन ने अब जिम्मेदारी सीधे प्रबंधन पर डाल दी है। जिलाधिकारी के आदेश के अनुसार यदि किसी स्कूली वाहन से दुर्घटना होती है तो संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और स्कूल की मान्यता तक समाप्त की जा सकती है।
कोहरे के खतरे को देखते हुए एक्सप्रेस-वे पर रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया गया है। एआरटीओ ने बताया कि कार और जीप की अधिकतम गति 75 किमी प्रति घंटा तथा ट्रक और बस की 50 किमी प्रति घंटा तय की गई है। तय सीमा से तेज चलने पर न केवल चालान होगा, बल्कि ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण की कार्रवाई भी की जाएगी।
एक्सप्रेस-वे और सड़कों पर हुई मौतों ने डीएम चन्द्र प्रकाश सिंह का साफ संदेश है कि अब चेतावनी नहीं, सीधी कार्रवाई होगी। सवाल बस इतना है—क्या सख्ती से हादसों पर ब्रेक लगेगा या फिर नियम कागजों तक ही सीमित रहेंगे?








