ब्रज रज ने सहेजे भगवान के चरण चिन्हों के निशान: संत श्यामानंद जी महाराज

मनोज चौधरी। वृंदावन से।

वृंदावन के संत पंडित श्यामानंद जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का ब्रज अवतरण केवल राक्षसों के विनाश के लिए नहीं, बल्कि अपने भक्तों के संग प्रेम लीला करने के लिए हुआ था। उन्होंने कहा कि भगवान को कंस या जरासंध जैसे असुरों के वध के लिए अवतरित होने की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि प्रकृति स्वयं एक ठोकर में उनका अंत कर देती है।

संत पंडित श्यामानंद जी महाराज

संत श्यामानंद जी महाराज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण तो इस धरा पर भक्त और अभक्त दोनों को जीवन का अंतिम लक्ष्य बताने आए थे। उनका उद्देश्य किसी का संहार नहीं, बल्कि संसार को प्रेम, भक्ति और आत्मबोध का मार्ग दिखाना था।

संत पंडित श्यामानंद जी महाराज

उन्होंने कहा कि जब भगवान ने ब्रजभूमि पर नंगे पांव चलकर अपने चरण रखे, तो इस पवित्र धरा ने उन निशानों को सहेज लिया। आज भी ब्रज की रज में भगवान के उन चरण चिन्हों का दर्शन भक्तों के लिए परम सौभाग्य का विषय है।

संत पंडित श्यामानंद जी महाराज

संत ने कहा कि ब्रजभूमि केवल तीर्थ नहीं, बल्कि वह स्थान है जहां ईश्वर ने स्वयं अपने भक्तों संग प्रेम की पराकाष्ठा का अनुभव कराया। यही कारण है कि ब्रज की प्रत्येक रज कण में भक्ति, प्रेम और लीला का अमर इतिहास बसता है।