मनोज चौधरी। वृंदावन से।
वृंदावन के संत पंडित श्यामानंद जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का ब्रज अवतरण केवल राक्षसों के विनाश के लिए नहीं, बल्कि अपने भक्तों के संग प्रेम लीला करने के लिए हुआ था। उन्होंने कहा कि भगवान को कंस या जरासंध जैसे असुरों के वध के लिए अवतरित होने की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि प्रकृति स्वयं एक ठोकर में उनका अंत कर देती है।

संत श्यामानंद जी महाराज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण तो इस धरा पर भक्त और अभक्त दोनों को जीवन का अंतिम लक्ष्य बताने आए थे। उनका उद्देश्य किसी का संहार नहीं, बल्कि संसार को प्रेम, भक्ति और आत्मबोध का मार्ग दिखाना था।

उन्होंने कहा कि जब भगवान ने ब्रजभूमि पर नंगे पांव चलकर अपने चरण रखे, तो इस पवित्र धरा ने उन निशानों को सहेज लिया। आज भी ब्रज की रज में भगवान के उन चरण चिन्हों का दर्शन भक्तों के लिए परम सौभाग्य का विषय है।









