ब्रज में दीपों से झिलमिलाया अध्यात्म, हर दीप में झलक रही भक्ति और ब्रज की परंपरा

संत पं. श्यामानंद जी महाराज

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ब्रजभूमि में दीपावली का पर्व केवल रोशनी का नहीं, बल्कि अध्यात्म का उजाला फैलाने वाला पर्व है। यहां दीप जलाने का अर्थ केवल अंधकार मिटाना नहीं, बल्कि हृदय में बसे अहंकार, राग-द्वेष और मोह के अंधकार को दूर कर भक्ति का प्रकाश फैलाना है।

संत पंडित श्यामानंद जी महाराज

वृंदावन, गोवर्धन, गोकुल और बरसाना में दीपावली पर हर गली और मंदिर ऐसे सजे हैं मानो स्वयं श्रीकृष्ण लीलाएं रचने उतर आए हों। ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर, राधारमण और राधादामोदर मंदिरों में हजारों दीपों से झिलमिलाते प्रांगणों में भक्ति की ऐसी लहर उमड़ी कि हर भक्त भाव-विभोर हो उठा।

संत श्यामानंद जी महाराज ने कहा कि ब्रज की दीपावली केवल बाहरी उत्सव नहीं है, यह आत्मा के भीतर परमात्मा के मिलन का पर्व है। जब घर-घर दीप जलते हैं तो यह संकेत होता है कि मनुष्य अपने भीतर भी प्रेम, दया और सत्य का दीप जलाए।

ब्रज में मान्यता है कि दीपावली की रात श्रीकृष्ण और राधारानी के प्रेम दीप जलते हैं, जो सम्पूर्ण जगत में आनंद का संचार करते हैं। इसीलिए यहां दीपावली केवल धन की नहीं, ‘ध्यान’ की दीपावली है।

वृंदावन के साधु-संतों ने भक्तों से आह्वान किया कि इस दीपोत्सव पर केवल घर नहीं, हृदय को भी आलोकित करें। तभी ब्रज की यह दिव्य परंपरा सार्थक होगी और हर जीवन में श्रीकृष्ण की कृपा का प्रकाश फैलेगा।