आज पूरे देश-दुनिया में धनवंतरी जयंती और धनतेरस का पर्व श्रद्धा और उल्लास से मनाया जा रहा है। आरोग्य और आयुर्वेद के देवता भगवान धनवंतरी के जन्मदिन पर भक्तों ने स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना की।
वृंदावन के संत पंडित श्यामानंद जी महाराज
वृंदावन के संत पंडित श्यामानंद जी महाराज ने कहा कि धनतेरस का अर्थ केवल सोना या चांदी खरीदना नहीं, बल्कि तन, मन और विचारों की शुद्धि है। उन्होंने बताया कि भगवान धनवंतरी ने समुद्र मंथन के समय अमृत कलश लेकर मानवता को जीवन का सच्चा धन दिया था।
पंडित जी ने कहा कि पूजा के समय उत्तर-पूर्व दिशा में कलश स्थापित कर भगवान धनवंतरी, लक्ष्मी और कुबेर की आराधना करनी चाहिए। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलश हस्ताय सर्वभय विनाशाय” मंत्र का जाप रोगों से मुक्ति और आरोग्य की प्राप्ति देता है।
उन्होंने संदेश दिया कि इस दिन स्वच्छता, संयम और सात्त्विक जीवन का संकल्प ही सच्ची पूजा है। स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है, और जब मन सात्त्विक होता है तो लक्ष्मी स्वयं घर में प्रवेश करती हैं