अब नहीं माना रिफाइनरी प्रशासन तो दिल्ली कूच तय

मधुवन दत्त चतुर्वेदी एडवोकेट, मथुरा

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अब नहीं माना रिफाइनरी प्रशासन तो दिल्ली कूच तय

सेवा सुरक्षा अनुबंध की मांग पर अड़े संविदा मजदूर, गांधी जयंती पर किया सत्याग्रह और रामधुन से प्रार्थना

गांधी जयंती और मथुरा रिफाइनरी शिलान्यास दिवस के अवसर पर संविदा श्रमिकों ने साफ चेतावनी दे दी है— यदि रिफाइनरी प्रशासन ने उनकी सेवा सुरक्षा अनुबंध की मांग को नहीं माना, तो अगला कदम दिल्ली स्थित IOC मुख्यालय की ओर कूच होगा।

विकास बाजार स्थित सेनानी स्मारक पर जुटे सैकड़ों संविदा श्रमिकों ने सत्याग्रह संकल्प को दोहराते हुए रामधुन गाई और रिफाइनरी के

कार्यकारी निदेशक को सन्मति देने की प्रार्थना की। श्रमिकों की प्रमुख मांग है कि रिफाइनरी में वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मियों को श्रमिक सुरक्षा और पारिश्रमिक चोरी पर रोक देने के लिए सेवा सुरक्षा अनुबंध लागू किया जाए।

आंदोलन का नेतृत्व पेट्रोलियम वर्कर्स यूनियन द्वारा किया गया। सभा की अध्यक्षता रिफाइनरी कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष बुंदा खान ने की।

सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ मजदूर नेता शिवदत्त चतुर्वेदी ने कहा,

> “गांधी जी ने जो सत्याग्रह का अस्त्र हमें दिया, वो अन्याय के विरुद्ध आज भी उतना ही प्रभावशाली है। रिफाइनरी की मजदूर विरोधी नीतियाँ श्रमिकों का दम घोंट रही हैं। अगर यह नहीं रुका तो श्रमिकों को दिल्ली तक जाना पड़ेगा।”

 

मधुवन दत्त चतुर्वेदी (एडवोकेट) ने सभा का संचालन करते हुए कहा,

> “राष्ट्रपिता ने सिखाया कि भद्र तरीकों से भी दुनिया बदली जा सकती है। हम शांति से अपनी बात कह रहे हैं, लेकिन अगर प्रबंधन की संवेदना नहीं जागी, तो संघर्ष तेज होगा।”

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान कार्यकारी निदेशक और मानव संसाधन प्रमुख ने श्रमिकों के उत्पीड़न पर रोक लगाने या समाधान देने की कोई पहल नहीं की है, जो कि बेहद चिंताजनक है।

सभा को आप नेता रवि प्रकाश भारद्वाज, यूनियन उपाध्यक्ष बीएम मेहता, राकेश रावत एडवोकेट, दिनेश कुमार पंडित, पदम सिंह, लक्ष्मण लवानिया, सोहनलाल दीक्षित, कामरेड किशनी और रघुवीर ने भी संबोधित किया।

जनक सिंह, यूनियन मंत्री, ने धन्यवाद ज्ञापन में बताया कि

> “देश भर के लोकसभा सांसदों को पत्र भेजे गए हैं। रिफाइनरी में संविदा श्रमिकों की स्थिति से उन्हें अवगत कराया गया है। अगले रविवार को काराकट से सांसद राजाराम मथुरा आकर मजदूरों से संवाद करेंगे और संसद में उनकी आवाज उठाएंगे।”

 

📌 मुख्य मांगें:

सेवा सुरक्षा अनुबंध लागू किया जाए

पारिश्रमिक चोरी पर रोक लगे

शोषण और भेदभाव की जांच व निराकरण हो

संविदा श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा मिले