-हरे कृष्ण आर्चिड में भगवताचार्य श्यामसुंदर पाराशर की कथा में की घोषणा
– जालंधर से आए भक्तों ने किया श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप का साथ दिए जाने का लिया संकल्प

मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह मस्जिद मुकदमा के हिंदू पक्षकार श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट रविवार दोपहर को एक बड़ी घोषणा की। श्रीकृष्ण जन्मभूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकर मूल गर्भ गृह स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण का भव्य मंदिर निर्माण कराने के लिए देश के हिंदुओं को एक मंच पर लेकर आने का ऐलान किया। साथ ही कहा कि दुनिया की कोई ताकत जन्मभूमि के मूल गर्भ गृह स्थल पर मंदिर का निर्माण करने से नहीं रोक पाएगी। कथा में मौजूद पंजाब के जालंधर से आए भक्तों ने न्यास के अध्यक्ष का इस लड़ाई में साथ दिए जाने का भरोसा दोनों हाथ उठाकर दिया। वह वृंदावन के हरे कृष्ण आर्चिड में प्रख्यात भगवताचार्य श्यामसुंदर पराशर की कथा में पंजाब जालंधर से आए भक्तों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के प्रपौत्र राजा वज्रनाभ द्वारा बनवाए गए अपने कुल देवता भगवान श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के इतिहास की विस्तार से जानकारी दी। कहा कि विधर्मियों ने चार बार भगवान श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को ध्वस्त करने का कार्य बड़ी क्रूरता पूर्वक किया। विधर्मियो ने मंदिर तो तोड़ा ही साथ साथ हिन्दुओं पर भी घोर अत्याचार किए। माता बहनों की अस्मिता को लूट लिया गया। उनको यहां से मोहम्मद गजनी बंदी बनाकर ले गया। मथुरा वृंदावन में नरसंहार कराया। औरंगजेब ने हिंदुओं पर तो जजिया कर लगा दिया। इतना ही नहीं वह विधर्मी भगवान के विग्रहों को मथुरा से ले गया और आगरा की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगवा दिए। जो आज भी लगे हुए हैं। भक्तों को महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने बताया कि मस्जिद को हटाकर वहां पर भगवान का मंदिर निर्माण कराए जाने और जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगे भगवान के विग्रहों को मथुरा लाने की मांग को लेकर न्यायालय में उन्होंने मुकदमा डाला और मजबूती के साथ कोर्ट में लड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस केस के हमारे पास महत्वपूर्ण और पुख्ता साक्ष्य हैं। यह मुकदमा हम आप सभी के सहयोग से अवश्य जीतकर रहेंगे और अपने गोविंद भगवान श्रीकृष्ण का मूल गर्भ गृह स्थल पर भगवान के मंदिर का निर्माण करवा कर ही दम लेंगे। हमको दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक पाएगी। जालंधर के भक्तों ने भी हाथ उठाकर महेंद्र प्रताप सिंह का इस लड़ाई में साथ दिए जाने का भी संकल्प लिया। इससे पहले उनका कथा मंच पर स्वागत किया गया। इस मौके पर अविनाश घई, पारस घई, आचार्य भागवत प्रसाद, अश्विनी, मधुसूदन, नरेश, कुशल जैन, बीरेंद्र, करुणा, कुमकुम देवी, नैनसी मौजूद रहे।








