मनोज चौधरी
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यमुनोत्तरी (कालिंदी) पर्वत की 20 हजार 731 फीट ऊंचाई से आ रही यमुना से 95 मील के तटवर्ती आबादी इलाकों में दहशत का माहौल बना हुआ है। पर, हथिनी कुंड, ओखला बैराज से मथुरा की ओर डिस्चार्ज किए रहे पानी की रफ्तार पर स्वयं जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह
अपनी टीम के साथ पैनी निगाहें रखे हुए हैं। हालांकि यमुना का जल मंगलवार की रात नौ बजे खतरे के निशान से 12 सेमी नीचे बह रहा था। गोकुल बेराज के सभी फाटक खोल दिए गए हैं।
इससे पानी का दबाव बलदेव विकास खंड के गांव अकोस के लिए खतरा बनता जा रहा है। वहीं वृंदावन क्षेत्र की तटवर्ती कालोनियों से लोगों को सुरक्षित करने की कार्रवाई जारी है। इधर नौहझील बांध तक पानी टक्कर मार रहा है। निचले इलाको में राहत का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
डीएम सीपी सिंह ने अपनी टीम के साथ यमुना के बढ़ते जल स्तर की स्थिति का जायजा लेने के लिए वृंदावन से अकोस गांव तक गए। कटान की स्थिति, राहत शिविर, तटवर्ती इलाकों की आबादी को मुनादी कर आपातकाल की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के लिए कहा जा रहा। आगाह किया जा रहा कि आम आदमी यमुना नदी की तरफ न जाए।
पुलिस अलर्ट, रास्तों पर पुलिस तैनात
एसएसपी श्लोक कुमार भी पुलिस बल के साथ लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों में दौरा कर रहे हैं। यमुना की तरफ जाने वाले रास्तों पर बैरियर लगा दिए गए हैं। पुलिस बल, गोताखोर, भी लगाए गए हैं।
एक टीम मुआवजे की कार्रवाई में जुटी
यमुना के जलस्तर बढ़ोतरी होने से करीब 50- 60 हजार हेक्टेयर में बोई गई धान और बाजरा की मुख्य फसल के अलावा सब्जी , तिलहन व दलहन की फसल डूब गई है। कुछ लोगों के आवास भी जलभराव की चपेट में आ गए हैं। डीएम ने बताया, यमुना नदी के जलस्तर बढ़ने से जो भी अब तक नुकसान हुआ है, उसका आंकलन कराया जा रहा जा रहा। प्रभावित लोगों को मुआवजा देने के आदेश जारी किए गए हैं।









