श्री कृष्ण जन्म स्थान मंदिर को लेकर दीवानी न्यायालय में एक और वाद दायर
-गर्भ गृह के चबूतरा को बताया 50 साल पुराना, बोर्ड लगवाने की कोर्ट से की गई अपील
मथुरा
श्री कृष्ण जन्म स्थान मंदिर को लेकर मथुरा दीवानी न्यायालय में एक और वाद हुआ दाखिल हुआ है। दिल्ली निवासी पीवी रघुनंदन ने सिविल जज सीनियर डिवीज़न अनुपमा सिंह के न्यायलय में घोषणात्मक डिग्री के लिए एक प्रार्थना पत्र दिया गया है। श्री कृष्ण जन्म स्थान मंदिर ट्रस्ट और जिला अधिकारी और नगर आयुक्त मथुरा वृन्दावन और एएसआई सहित सात पक्षकार बनाए गए है। शाही ईद गाह मस्जिद कमेटी को इसमे पक्षकार नहीं बनाया गया है। श्री कृष्ण जन्म स्थान गर्भ गृह के चबूतरा को इसमे सिर्फ 50 साल पुराना बताया गया है, जबकि मस्जिद का 500 वर्ष पुराना बताई गई है।
वादी अधिवक्ता पी वी रघुनंदन ने प्रार्थना पत्र में कहा है कि यहां यह उल्लेख करना उचित है कि सूट अनुसूचित है। जिस स्थान को भगवान श्री कृष्ण का वास्तविक जन्म स्थान बताया, दर्शाया और घोषित किया गया है।वह सत्य और गलत नहीं है। यह है एक रिकॉर्ड की बात है । जनवरी 1670 (एक हजार छह सौ सत्तर) के महीने में मुगल सम्राट औरंगजेब ने भव्य भगवान कृष्ण मंदिर को तोड़ दिया था। कटरा केशव देव और उसके स्थान पर उसी स्थान पर एक शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण किया गया। वही मस्जिद अभी भी वहीं खड़ी है और शाही ईदगाह मस्जिद के रूप में जानी जाती है। यह स्पष्ट है कि औरंगजेब मुगल सम्राट ने जब मंदिर को ध्वस्त करने का आदेश दिया था, तो वह जेल कोठरी नहीं रख सकता था, जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था और उक्त जेल कोठरी के बगल में मस्जिद का निर्माण कर सकता था, जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। . मुग़ल सेना की सबसे पहली कार्रवाई भगवान कृष्ण जन्मस्थान मंदिर उर्फ कटरा केशव देव मंदिर को ध्वस्त करने के लिए हुई।। फिर उक्त मंदिर के मलबे का उपयोग करके उस पर एक मस्जिद का निर्माण किया गया। ये भी
औरंगजेब फरमान में उल्लेख किया गया है जैसा कि बीकानेर राज्य अभिलेखागार, बीकानेर, राजस्थान में संरक्षित है। वादी ने बताया कि उनकी मांग यह है कि जहां चबूतरा बना है, वहां एक संकेतक लगना चाहिए। ताकि लोगो को यह पता रहे कि यह श्री कृष्ण के जन्म का चबूतरा नहीं बल्कि एक उसका संकेत है।








