विश्व को उसी की भाषा में समझानी होगी पंचगव्य की प्रमाणिकता: मोहन भागवत

विश्व को उसी की भाषा में समझानी होगी पंचगव्य की प्रमाणिकता: भागवत

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख डॉ मोहन भागवत

-भारत के उत्थान के संग कदम से कदम बढ़ा कर आगे चल रही गौमाता
मनोज चौधरी

: गाय का संबंध सभी प्रकार की उन्नतियों से है। भारत के उत्थान के संग-संग गौमाता भी एक आगे कदम बढ़ाकर चल रही है। गाय हमारी नहीं विश्व की माता है। सदियों से जीवन के अनुभव में हमने निरंतर गौ सेवा को प्रत्यक्ष रूप में पाया है। जहां श्रद्धा और विश्वास की कमी आई है। अब जमाना आ गया है, सब प्रमाण मांगते है। हमको विश्व की उसकी ही भाषा में गौ माता के पंचगव्य को समझाना होगा। इसके लिए सभी चिंताएं छोड़कर के अमृत मिलने तक मंथन करना होगा।
दीनदयाल गौ विज्ञान अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र गौ ग्राम परखम के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए मंगलवार को राष्ट्रीय स्वय ंसेवक संघ के प्रमुख डा. मोहन भागवत ने कहा कि हम सबसे प्राचीन कहलाते हैं और आधुनिक बनते है। भारत हमेशा भारत रहता है। पर्यावरण हमारा पालन करता है, तभी हम पेड़ों के जीवन से कृतत्व और बुद्धि की भी सीख लेते है। उसका उपयोग कर उसके दाम दोगुना कर वापस करते हैं। यही भाव है। आज हमारी आत्मा, शरीर, मन और बुद्धि गंदी हो गई है। उसको स्वच्छ करना है। पंडित दीनदयाल धाम आने के अपने पिछले अनुभव को बताते हुए संघ प्रमुख ने अंत्योदय का भी महत्व समझाया और कहा जब तक अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की उन्नति होने पर ही भारत की उन्नति होगी। आज यहां रोजगार, हुनर और विषमुक्त खेती करना सिखाया जा रहा है। खेती करने वाला कर्जा कर लेता है, उसका उपाय क्या है। घर में संस्कार नहीं बन रहे है, उसका उपाय क्या है। उन्होंने गो सेवा को ही इसका उपाय बताया और कहा अब जमाना आ गया है, उसको इसके प्रमाण चाहिए है। जहां श्रद्धा की कमी हो गई हो और विश्वास में भी कमी हो आई हो। वहां गौ के पंचगव्य की प्रमाणिकता को विश्व को उसी की भाषा में समझाने का यह महत्वाकांक्षी योजना है। उन्होंने गायों की रक्षा को लेकर किए गए पहले आंदोलन को याद दिलाते बताया कि जब गायों के गोबर और मूत्र के महत्व को समझाते थे, तब लोगों को सब बाते बेकार लगती थी। हिंदुओं से ही दकियानूसी शब्द कहे जाते थे। इस भूले बिसरे को अपनी सत्यनिष्ठा से सृष्टि के आगे रखना होगा। गाय की दूध की महिमा सब लोग मानते है। गो सेवा का प्रमाण बढ़ा है। गोशाला बन रही है। योगदान के लिए लोग आगे रहे है। अब इस श्रद्धा को लोग भूल गए है और हमें उसे याद कर रहे है। संघ प्रमुख ने कहा, यह कोई संयोग नहीं है। उन्होंने इसे भारत का उत्थान और धर्म का उत्थान बताते हुए कहा कि दुनिया को आज उसकी भाषा में इसको समझाने का समय है। हम विश्व को एक कुटुम्ब मानते हैं, उसे बताना होगा कि हम गाय से विषमुक्त खेती कर सकते है। गाय के दूध में तेजस्विता है। इसलिए यहां पंचगवय पर अनुसंधान और आयुर्वेद से उपचार करने के लिए हमको बिना थके हारे चलना है। अच्छे कार्यों की परीक्षा ऐसे ही होती। हमको अमृत चाहिए, अमृत मिलने तक मंथन होता रहना चाहिए। जो निश्चित किया, वह संकल्प पूरा होगा। तीस साल राम मंदिर बनाने में लग गए। कौन क्या कहता है, इसकी चिंता छोड़कर, प्राणों की भी चिंता नहीं करना है। हमको सृष्टि के कल्याण के लिए यह कार्य करना होगा। इस कार्य के पीछे संघ की शक्ति है। इसलिए यह काम सतत करना होगा। जो गाय से प्रेम करते, उसे माता मानते है तो उसकी सेवा में कोई कमी नहीं आने देनी है। तब हमारे उत्साह बढ़ेगा। विश्व में आनंद ही आनंद होगा। जैसा आंनद हमको अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाला है।