महाभारत के नायक श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से सभी संकल्प होंगे पूरेः मोदी

  • -ब्रज के विकास को लेकर कांग्रेस पर साधा निशाना
    -श्रीकृष्ण के भव्यता के दर्शन होने की बात कहकर रखी मिशन 2024 के लक्ष्य को पाने की आधार शिला
    मनोज चौधरी, ब्रजभूमि से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन-2024 के लक्ष्य को पाने की आधारशिाल रखते गुरुवार को कहा कि महाभारत के नायक श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से सभी संकल्प पूरे होंगे। अयोध्या, काशी, उज्जैन, केदारघाटी की तरह ही भविष्य में भगवान श्रीकृष्ण के भव्यता से दर्शन होने की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही मस्जिद ईदगाह के मसले को भी सुलझाने के साफ संकेत भी दे गए।
    धौलीप्याऊ स्थित रेलवे ग्राउंड पर मीराबाई की 525 वीं जन्म जयंती पर आयोजित ब्रजराज उत्सव में शामिल होने के लिए आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राधे-राधे, जय श्रीकृष्ण के जयघोष के साथ अपना संबोधन शुरु किया। प्रधानमंत्री ने देरी से आने के लिए ब्रजवासियों से क्षमा मांगते हुए कहा, वह राजस्थान के चुनावी मैदान से सीधे यहां भक्ति वातवारण में आए हैं। इसको अपना सौभाग्य बताते हुए कहा, यहां वही आता है, जिसको श्रीजी और श्रीकृष्ण बुलाते हैं। उन्होंने कहा, ब्रज भूमि कोई साधरण भूमि नहीं है। यह भमि श्यामा श्यामजू का धाम है। इसे ब्रज की लाडली और उनके प्रेम के अवतार की भूमि बताते हुए कहा कि यहां की रज पूरे संसार में पूज्यनीय है। यहां की रज में राधारानी रमी हुई और कण-कण में श्रीकृष्ण समाए हुए है। ब्रज के महत्व को समझाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के तीर्थाें की यात्रा से अधिक पुण्य लाथ ब्रज चौरासी कोस की यात्रा से मिलता है। संत मीराबाई की 525 वीं जन्म जयंती संत मीराबाई के नाम पर टिकट और सिक्का जारी करने का भी मौका उनको मिला है। प्रधानमंत्री ने दिव्य ब्रज के स्वामी श्रीकृष्ण और राधारानी को प्रणाम करते हुए यहां के संतों को भी नमन किया और कहा सांसद हेमामालिनी तो ब्रज में रम गई हैं। ब्रज का रिश्ता गुजरात से बताते हुए कहा, भगवान श्रीकृष्ण यहां जाकर गुजरात में द्वारकाधीश बने और मीराबाई ने भी अपने अंतिम दिन गुजरात में बिताए। मीराबाई के पदों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, गुजरात से लोग जब उत्तर प्रदेश और राजस्थान में फैले ब्रज में द्वारकाधीश की कृपा से आते हैं। तो उनको यहां की संस्कृति की अनुभूति होती है। इस संस्कृति को प्रधानमंत्री ने सबका विकास और सबका साथ नारे से भी जोडा। कहा, 2014 में मुझे मां गंगा ने बुलाया और तभी से आपकी सेवा में लीन हो गया। प्रधानमंत्री ने कहा यह उत्सव नर-नारायण, जीव-शिव, भक्त और भगवान का प्रेम का उत्सव है। मीराबाई राजस्थान की मेवाड़ की रणभूमि में जन्मी और ब्रज चौरासी कोस ब्रज मंडल को मीराबाई ने अपनी भक्ति और अध्यात्म से सींचा था। कहा कि उन्होंने भारत की चेतना को भी सींचने का काम किया। मेरे तो गिरधर गोपाल पद का जिक्र करते हुए कहा कि ब्रज शौर्य और पराक्रम की भूमि है। जो भारत के अतीत की रक्षा को दिए गए बलिदान की याद दिलाती है। इसकी रक्षा के लिए राजस्थान के लोग दीवार बन कर खड़े रहे, यही भारत की पहचान है। उन्होंने ने कहा, बांसुरी बजाते कृष्ण को देखा तो महाभारत में सुदर्शन चक्रधारी को भी देखा। भारत नारी शक्ति का देश है। यहां नारी की पूजा होती है। ब्रज में तो पहले लाडली जी की सरकार चलती है। जब तक राधा का नाम श्रीकृष्ण ने नहीं जुड़ता है, तब श्रीकृष्ण का नाम पूरा नहीं होता है। इसेे ब्रजवासियों से बेहतर कोई भी नहीं समझ सकता है। उन्होंने कहा, यहां महिलाओं ने भी भारत में मुश्किल घड़ी में बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियां उठाई हैं। सामाज का मार्गदर्शन भी किया। प्रधानमंत्री ने संत मीराबाई के दर्शन को भी समझाया और कहा कि मीराबाई समाज सुधारक और पथप्रदर्शक भी रहीं। वर्तमान काल की चुनौतियों और रुढ़ियों से भी मुक्ति की सीख मीराबाई ने दी। वह विघ्न से नहीं डरती थीं। प्रधानमंत्री ने कहा, जब-जब भारत की चेतना पर प्रहार हुआ है और वह कमजोर हुई है। तो देश के किसी न किसी कोने में जागृत ऊर्जा का पूंज हुआ है। कोई योद्धा बना तो कोई संत। यह पूंज आज भी जारी है। इसी पूंज ने देश को दिशा देने का और संकल्प लेने का काम किया है। देश भर के संतों का जिक्र करते हुए कहा, भक्ति और ज्ञान की धारा पूरे संसार में भारत से निकली है। भक्ति आंदोलन का ब्रज को संगम बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद ब्रज के विकास को महत्व नहीं दिया गया। जो लोग भारत के अतीत, संस्कृति को आज गुलामी की मानसिकता से देखते हैं, उन्होंने ब्रज का विकास नहीं किया। मगर अमृत काल में यह संभव हुआ। गुलामी की मानसिकता दूर हुई। पंच प्रण भी हमने लिए। काशी विश्वनाथ, उज्जैन महाकाल और केदार घाटी में भव्यता और दिव्यता से हो रहे दर्शन की बात कहते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी साफ कर दिया कि आने वाले समय में भगवान श्रीकृष्ण के भी उसी तरह भव्यता और दिव्यता से दर्शन होंगे। यह भूमि कान्हा की लीला से जुड़ी है, सरकार उसका संपूर्ण विकास करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा, जब भी किसी राज्य का स्वरूप बदला है तो युद्ध होता है। ऐसे ही महाभारत हुआ है। महभारत के ही नायक श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से हम इन सभी संकल्पों को पूरा करेंगे।