क्या कहता है ये संसार

आज में एक कहानी कहता हूं, अपने जीवन के अनुभव की। आप भी इसके पात्र तो नहीं। हैं तो अवश्य पढ़ कर अपनी प्रतिक्रिया दीजीए।

एक मानव का जन्म क्यों हुआ। धन, वैभव और नाम कमाने को।

आपका उत्तर होगा–हां

इसमें न का सवाल कहां है। है केवल हां।

अगर धन दूसरे नम्बर का भगवान नहीं है तो बताओ। लक्ष्मी जी की आरती याद करो।

नाम की बात करो तो राम, कृष्ण, शिव, यानी अंनत नाम धारी।

इनका वैभव ही तो है।

अयोध्या में राम, काशी में विश्वनाथ और मथुरा में कृष्ण ।

रामायण, शिव पुराण और गीता। ग्रन्थ नहीं मानव जीवन के अनमोल उपहार हैं।

छल, कपट, प्रपंच, षड्यंत्र और धोखेबाजी की दुर्गति का भी वर्णन है।

जीव और आत्मा , जीवन और मरण, यश औऱ अपयश, परमार्थ और स्वार्थ,  निर्बल और सबल, सुख और दुःख—ये अनेक जोड़े हैं।

हर जोड़े के तोड़ रामायण और गीता में हैं।

जन्म से लेकर मृत्यु तक की हर लीला से गुजरने वाला ही सबसे बड़ा खिलाड़ी है। जीवन काल में फेंके जानी वाली बॉल पर सांस के ‘रन’ भी यही खिलाड़ी तय करता है।

एक एक अंक यानि एक रात और दिन का वक्त। कहते है कि जो समय को पहचान ले उसे इंसान कहते है, जो वक्त को  बदल दे उसको ही भगवान कहते है।

-कैसे बदला बॉस ने वक्त:

में जिस अखबार मे समाचार संकलन और लेखन का काम करता था। उस दैनिक जागरण की आगरा यूनिट के संपादक बनने से पहले में अवधेश माहेश्वरी के साथ आठ साल बतौर रिपोर्टर और 10 महीने तक मथुरा में कार्यवाहक प्रभारी का कार्य कर चुका था। इसी यूनिट के संपादक विनोद भरद्वाज, आनंद शर्मा, अवधेश गुप्ता और उमेश शुक्ला जी की टीम का हिस्सा बनकर काम कर इससे पहले काम किया।   इसका प्रतिफ़ल मुझे मिला। आगरा यूनिट में मुझको अवधेश गुप्ता जी ने मुझे स्थाई रिपोर्टर बनवाया ।  रिटायर होने से शुक्ला जी ने मेरे वेतन में चार हजार रुपये की बढ़ोतरी कर मुझे 21 हजारी का कर्मचारी बनाया। मगर, अवधेश माहेश्वरी को अचानक मुझमें खराबी नजर आ गई। नवंबर 2022 को रीढ़ की हड्डी में हुई तकलीफ का इनको बहाना मिल गया। एक महीने से अधिक की छुट्टियां बिताने के बाद जब कार्यालय गया तो पता चला कि संपादक अवधेश माहेश्वरी ने मथुरा प्रभारी को हुक्म सुना दिया कि इस व्यक्ति को आगरा कार्यालय भेज दिया जाए। आरोप लगाया गया कि अब खबरों में धार कम हो गई है। कारण पूछा तो कह दिया कि मथुरा प्रभारी को सब कुछ बता दिया। वहीं पूछ लो। जब प्रभारी से पूछा गया तो कह दिया गया कि बॉस पूछे। हमने दोनों के सामने अपनी बात रखी। जो दिक्कत थी, बताई। पर जवाब भी मिला वह था

बेरहमी का

दे दिया त्याग पत्र

मिल गई शांति

फिर हुआ हमदर्दी का खेल

पर

———– आगे – दुनिया का शक्तिशाली मंत्र