
-सौ मीटर की दूरी ढाई-तीन घंटे में हो रही तय
-दर्शन को गलियों में श्रद्धालुओें के बीच मच रही चीख-पुकार
मथुरा: वृंदावन में बांके बिहारी जी के दर्शन करने के लिए आ रही भीड़ को नियंत्रण करने के लिए प्रशासन और पुलिस ने अब तक जो भी योजनाएं बनाई, वे सभी विफल सिद्ध हुई हैं। सोमवार को विद्यापीठ चौराहे और जुगलघाट से मंदिर तक की दूरी तय करने में ढाई से तीन घंटे तक समय लगा। श्रद्धालुओं के बीच में चीख-पुकार मचती रही है। तमाम श्रद्धालु बिना दर्शन किए ही लौट गए।
वृंदावन में भीड़ को नियंत्रण कर श्रद्धालुओं सुलभ और सुरक्षित दर्शन कराने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की गई। मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने एक करोड़ रुपये की लागत से साफ्टवेयर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी बोर्ड बैठक में पास किया। हालांकि अभी साफ्टवेयर मंदिर प्रबंधन को नहीं मिला है। इसके साथ ही कॉरिडोर का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। यातायात व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने के लिए भारी, चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है। ई-रिक्शा संचालन को रूट भी तय कर दिए गए है। उसके बाद भी यहां आ रहे श्रद्धालुओं केा अव्यवस्था ही झेलनी पड़ रही है।
वृंदावन में श्रद्धालुओं की भीड़ में जिस तरह से बढ़ोतरी हो रही है। उसके सामने अब तक किए गए सभी इंतजाम विफल सिद्ध हुए है। सोमवार को ठाकुर बांके बिहारी जी मंदिर को जाने वाले सभी रास्ते भीड़ से खचाखच भर गए। विद्यापीठ चौराहे-जुगल घाट की ओर से श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में ढाई से तीन घंटे तक समय लग गया। श्रद्धालुओं के बीच चीख-पुकार मचाती रही। धक्का-मुक्की और चिलचिलाती धूप में श्रद्धालु व्याकुल हो गए। पर वह दर्शन करने को जूझते रहे। पुलिस और प्रशासन भी भीड़ के सामने असहाय नजर आया। कई श्रद्धालु भीड़ को देख कर ठाकुरजी के बिना दर्शन किए ही वापस लौट गए। यातायात भी बेपटरी हो गई। जाम में सैकड़ों के वाहन और उनके बीच में श्रद्धालु फंस गए।








