राजनीतिक अखाड़े को मल्ल की तलाश

आदित्यमंगल न्यूज़

उत्तर प्रदेश में निकायों के महापौर और अध्यक्ष पद के आरक्षण की अनंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं। जिताऊ उम्मीदवार की तलाश संगठनों में तेज हो गई। दावेदार भी ताल ठोक कर अपने अपने दल के कद्दावर नेताओं की शरण में पहुंच गए हैं। दिलासा और भरोसे की घुट्टी पिलाई जा रही है। भाजपा का समर्थन पाकर चुनाव मैदान में कूदने वालों की संख्या अधिक है।

प्रदेश की 762 में से 760 निकायों के महापौर और अध्यक्ष पद के आरक्षण की अनंतिम अधिसूचना जारी हो चुकी है। 17 महानगर, 199 नगर पालिका परिषद और 544 नगर पंचायत के लिए महापौर, अध्यक्ष और सदस्य पद के लिए चुनाव होना है। अभी अधिकांश निकायों में भाजपा काबिज है। इस बार भाजपा की प्रदेश के सभी निकायों पर काबिज होने की कोशिश रहेगी। भाजपा को बढ़त बनाने से रोकने के लिए विपक्षी दलों ने भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना आरंभ कर दिया है।  रालोद और सपा मिलकर चुनाव में उतर सकती हैं। बसपा और कांग्रेस अपने-अपने बलबूते पर अभी तक चुनाव लड़ने के मूड में है। गठबंधन होने जैसे दोनों दलों की तरफ कोई संकेत अभी नहीं मिले है। रालोद और सपा का पहले से ही गठबंधन है।

वर्ष 2024 में होने वाले लोक सभा चुनाव के दृष्टिकोण से निकाय चुनाव भाजपा के लिए बहुत अहम है। और एक बड़ी चुनौती भी है। जो भाजपा की निकाय स्तर पर मतदाता के ऊपर उसकी पकड़ के पैमाने को निर्धारित करेगा। निकायों में कराए गए विकास कार्यों में नाली, खड़ंजा और पेयजल के मुद्दे अहम होंगे। स्वच्छता के क्षेत्र में किए गए कार्य भी गिनाए जाएंगे। जन सुविधा देने में भाजपा का ग्राफ आम आदमी की नजर क्या है। यह  चुनाव परिणाम के बाद साफ हो जाएगा।

  1. दरअसल, इससे पहले हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाजपा का चुनावी धरातल काफी मजबूत रहा । वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव पूर्व का बड़ा रिहर्सल और राजनीतिक दंगल के रूप में निकाय चुनाव को देखा जा रहा है।