मनोज चौधरी
अधिक मास में निर्णायक चरण में प्रवेश करेगा श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन, 25 लाख लोगों तक पहुंचाने की तैयारी
परिक्रमा, कथा और संत मंचों के जरिए बड़े जनसंपर्क अभियान की रूपरेखा तैयार
मथुरा।
श्री कृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति को लेकर चल रहा आंदोलन अब एक नए और निर्णायक चरण में प्रवेश करने जा रहा है। अधिक मास के अवसर को केंद्र में रखते हुए श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास ने व्यापक जनसंपर्क अभियान की तैयारी तेज कर दी है। न्यास के अध्यक्ष एवं श्री कृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही ईदगाह मस्जिद प्रकरण के हिन्दू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने बताया कि 17 मई से 17 जून तक चलने वाले अधिक मास में 25 लाख श्रद्धालुओं तक इस मुद्दे को पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है।
महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने बताया कि अधिक मास के दौरान ब्रज क्षेत्र में होने वाली 84 कोस परिक्रमा और वृंदावन में आयोजित भागवत कथाएं इस अभियान के प्रमुख आधार होंगी। देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच संत-समाज और भागवताचार्यों के माध्यम से श्री कृष्ण जन्मभूमि प्रकरण को प्रमुखता से रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस बार आंदोलन केवल सीमित सभाओं तक नहीं रहेगा, बल्कि सीधे श्रद्धालुओं के बीच पहुंचकर संवाद स्थापित किया जाएगा। परिक्रमा मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर शिविर लगाए जाएंगे, जहां यात्रियों से संपर्क कर उन्हें इस विषय के ऐतिहासिक और न्यायिक पहलुओं की जानकारी दी जाएगी।
न्यास अध्यक्ष ने दावा किया कि श्री कृष्ण जन्मभूमि के मूल गर्भगृह स्थल को लेकर चल रहा विवाद अब राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुका है। उन्होंने कहा कि पूर्व में द्वारिका, बद्रीनाथ और रामेश्वरम-पंढरपुर से निकाली गई यात्राओं ने आंदोलन को देशव्यापी पहचान दिलाई है, जबकि अब इसे और व्यापक जनसमर्थन में बदलने की तैयारी है।
महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने बताया कि अधिक मास के दौरान एक बड़ी वाहन यात्रा निकालने की भी योजना है, जिसकी तिथि जल्द घोषित की जाएगी। इसके लिए अयोध्या, काशी और हरिद्वार के प्रमुख संतों से लगातार संपर्क साधा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ब्रज में अधिक मास के दौरान लाखों श्रद्धालुओं का आगमन होता है, ऐसे में यह अभियान अब तक का सबसे बड़ा जनसंपर्क प्रयास साबित हो सकता है। न्यास का मानना है कि इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों तक सीधे पहुंच बनाकर आंदोलन को नई गति दी जाएगी।
अधिक मास को केंद्र में रखकर तैयार की गई यह रणनीति श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन को एक नए और व्यापक चरण में ले जाने का संकेत दे रही है, जिस पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।








