कक्षा से किले तक: डाइट प्रशिक्षुओं ने इतिहास को जिया

हरेश सिंह, प्रवक्ता डाइट मथुरा

6मई 2026

किताबों में पढ़ा गया इतिहास जब वास्तविक स्थलों पर सजीव रूप में सामने आता है, तो शिक्षा एक नए आयाम को छूती है। इसी अनुभव को आत्मसात करते हुए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) मथुरा के डीएलएड बैच 2024 के प्रशिक्षुओं का 52 सदस्यीय दल ऐतिहासिक नगरी जयपुर के शैक्षिक भ्रमण से लौट आया है।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के निर्देशानुसार आयोजित इस भ्रमण का उद्देश्य प्रशिक्षुओं को पाठ्य पुस्तकों से परे व्यावहारिक और अनुभवात्मक ज्ञान प्रदान करना था। प्राचार्य डॉ. मुकेश चंद्र अग्रवाल के नेतृत्व में दल ने आमेर का किला, जवाहर कला केंद्र, सरस डेरी (जयपुर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड) और चौकी ढाणी जैसे प्रमुख स्थलों का अवलोकन किया।

भ्रमण के दौरान प्रशिक्षुओं ने आमेर किले की भव्यता के साथ-साथ वहां की प्राचीन जल प्रबंधन प्रणाली को करीब से समझा। वर्षा जल को भूमिगत टैंकों में संरक्षित करने की व्यवस्था ने आधुनिक वाटर हार्वेस्टिंग की अवधारणा को और स्पष्ट किया। गाइड द्वारा दी गई जानकारी के माध्यम से राजा मानसिंह के शासनकाल, उस समय की जीवनशैली, खान-पान और वास्तुकला की विशेषताओं को भी जाना।

 

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कला प्रवक्ता शिखा शर्मा ने बताया कि किले की दीवारों पर बनी भित्ति चित्रकारी ‘मिनीएचर पेंटिंग’ शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो उस युग की सांस्कृतिक समृद्धि और कलात्मकता को दर्शाती है।

प्राचार्य डॉ. मुकेश चंद्र अग्रवाल ने कहा कि इस प्रकार की शैक्षिक यात्राएं प्रशिक्षुओं के लिए अत्यंत उपयोगी होती हैं। इससे कक्षा में पढ़ाया गया इतिहास स्थायी रूप से समझ में आता है और प्रशिक्षु यह भी जान पाते हैं कि अतीत से वर्तमान के लिए क्या सीख ली जा सकती है।

इस शैक्षिक भ्रमण में प्रवक्ता हरेश सिंह, शिखा शर्मा, जिला व्यायाम शिक्षिका सीमा शर्मा, सूर्यकांत शर्मा, लोकेश एवं राजकुमार ने प्रशिक्षुओं का मार्गदर्शन और सहयोग किया। संस्थान के प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी हरेश सिंह ने भ्रमण से संबंधित समस्त जानकारी साझा की।