मनोज चौधरी
मथुरा।
जहां हर दिन लाखों श्रद्धालु भक्ति और विश्वास के साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं, वहीं उसी प्रसाद में मिलावट का कड़वा सच अब सामने आने लगा है। मथुरा और वृंदावन की पवित्र गलियों में बिक रहा प्रसाद अब श्रद्धा नहीं, बल्कि सेहत के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है—और इससे भी बड़ा खतरा है इस तीर्थनगरी की साख पर पड़ता दाग।
हाल ही में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तर प्रदेश की छापेमारी में जो खुलासे हुए, उन्होंने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। अवैध मिठाई निर्माणशालाओं में गंदगी के बीच तैयार हो रही डोडा बर्फी, दूषित पेड़े और संदिग्ध सामग्री यह साफ संकेत दे रहे हैं कि मुनाफे की अंधी दौड़ में श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
यह वही प्रसाद है, जिसे भक्त मंदिरों में चढ़ाकर अपने घर ले जाते हैं—इस विश्वास के साथ कि यह पवित्र और शुद्ध है। लेकिन हकीकत यह है कि कई दुकानदार इस आस्था को ही व्यापार का साधन बनाकर मिलावटी और अस्वच्छ खाद्य सामग्री परोस रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे दूषित खाद्य पदार्थ पेट संबंधी रोगों, फूड पॉइजनिंग और संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। यानी श्रद्धा के साथ खरीदा गया प्रसाद, बीमारी का कारण बन सकता है।
इस पूरे मामले का दूसरा और उतना ही गंभीर पहलू है—मथुरा-वृंदावन की छवि पर पड़ता असर। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु जब ऐसी घटनाओं की जानकारी पाते हैं, तो उनके मन में इस पवित्र नगरी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होने लगते हैं।
अधिकारियों का वर्जन:
सहायक आयुक्त (खाद्य) धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट कहा कि
“श्रद्धालुओं की सेहत के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। जो भी प्रतिष्ठान खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी ज्ञानपाल सिंह ने बताया कि
“जनपद में निरंतर अभियान चलाकर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। संदिग्ध नमूनों को प्रयोगशाला भेजा गया है और रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
प्रशासन की इस सख्ती के बावजूद बड़ा सवाल अब भी कायम है—क्या आस्था की नगरी में प्रसाद की शुद्धता बहाल हो पाएगी, या फिर श्रद्धालुओं का विश्वास इसी तरह मिलावट की भेंट चढ़ता रहेगा?








