सावित्रीबाई फुले के आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प, शहर से गांव तक गूंजा शिक्षा और समानता का संदेश

 

दिलीप यादव, वरिष्ठ पत्रकार। मथुरा।

भारत की प्रथम महिला शिक्षिका एवं महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की जयंती जनपद मथुरा में पूरे उत्साह और सामाजिक चेतना के साथ मनाई गई। शहर से लेकर देहात तक आयोजित कार्यक्रमों में उनके शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया गया।

शहर के डेंपियर नगर स्थित समाजवादी पार्टी महानगर कार्यालय पर महानगर अध्यक्ष श्रीमती रितु गोयल की अध्यक्षता में भव्य जयंती समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता, पदाधिकारी एवं महिलाएं शामिल हुईं। सभी ने सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके संघर्षमय जीवन को स्मरण किया।

इस अवसर पर महानगर अध्यक्ष रितु गोयल ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने उस दौर में महिला और वंचित समाज के लिए शिक्षा का दीप प्रज्वलित किया, जब इसकी कल्पना भी कठिन थी। उन्होंने कहा कि आज समाज को उनके बताए मार्ग—शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय—पर चलने की सबसे अधिक आवश्यकता है।

कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य प्रहलाद यादव, डॉ. राजन रिजवी (प्रदेश महासचिव, अल्पसंख्यक सभा), महानगर उपाध्यक्ष सज्जन क्रांति, पिछड़ा वर्ग विधानसभा अध्यक्ष अनिल निषाद, अनुसूचित जाति महानगर अध्यक्ष मनीष आजाद सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन पिछड़ा वर्ग महानगर अध्यक्ष देवकीनंदन कश्यप ने किया।

इधर, देहात क्षेत्र के गांव अड़ींग में भी सावित्रीबाई फुले की जयंती पर विशेष आयोजन किया गया। सैनी धर्मशाला से महिला-पुरुषों ने पथ संचलन निकालते हुए गांव में रैली की। जयघोषों के साथ लोगों ने सावित्रीबाई फुले के आदर्शों—शिक्षा, नारी सम्मान और सामाजिक समानता—को अपनाने का आह्वान किया।

गांव अड़ींग के कार्यक्रम में प्रताप सैनी, अजीत सैनी, राम खिलाड़ी बघेल, चंदो सविता सहित अनेक महिलाओं और पुरुषों ने सहभागिता की। कार्यक्रम की अध्यक्षता शकुन्तला ने की तथा संचालन कु. ज्योति ने किया।

शहर और गांव, दोनों ही स्थानों पर हुए आयोजनों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि सावित्रीबाई फुले के विचार आज भी समाज को नई दिशा देने में प्रासंगिक और प्रेरणादायी हैं।