गोवर्धन रोड पर बहता गंदा पानी बना परेशानी का सबब, फोरलेन सिंगल लेन में तब्दील

 

दिलीप यादव, वरिष्ठ पत्रकार। मथुरा।

जनपद के व्यस्ततम मार्गों में शामिल गोवर्धन रोड की हालत इन दिनों बदहाल बनी हुई है। रोजाना वीआईपी, जनप्रतिनिधि और आला अधिकारी इस मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन सड़क पर बह रहे गंदे पानी की समस्या पर अब तक कोई ठोस ध्यान नहीं दिया गया है।

मार्ग पर भरा पानी

गोवर्धन रोड स्थित खामनी गांव और एमवीडीए से अप्रूव्ड राधा सिटी कॉलोनी से निकल रहा गंदा पानी सड़क पर फैलने से फोरलेन सड़क सिंगल लेन में सिमट गई है। संतोषा और कामिनी क्षेत्र में हालात ऐसे हो गए हैं कि सड़क पर मजबूरन वन-वे जैसा हाल बन गया है। तेज रफ्तार वाहन चालक जल्दी निकलने की होड़ में दुर्घटनाओं को दावत दे रहे हैं।

गौरक्षा से जुड़े पवन दुबे ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस गंभीर समस्या की ओर लोगों और प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया है।

उल्लेखनीय है कि मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) द्वारा किसी भी कॉलोनी को अप्रूव्ड करने के नियम बेहद कड़े बताए जाते हैं। इसके बावजूद श्री ग्रुप की गोवर्धन रोड स्थित, सतोहा के निकट बनी राधा सिटी कॉलोनी में गंदे पानी के समुचित निस्तारण की व्यवस्था न होने के बावजूद इसे कैसे स्वीकृति दी गई, यह बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। कॉलोनी पूरी तरह बसने के बाद जब उसका गंदा पानी फोरलेन गोवर्धन रोड पर बहने लगा, तब इसकी हकीकत सामने आई।

राधा सिटी रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष हरिमोहन शर्मा ने बताया कि गुलमोहर, मन्नत, विंटेज सहित आसपास की सभी कॉलोनियों के पानी का निकास एक ही व्यवस्था से होना प्रस्तावित है। पहले पीडब्ल्यूडी ने सड़क किनारे नाला बनाया था, जिसे बाद में तोड़कर एमवीडीए ने करीब दो करोड़ रुपये की लागत से नया नाला निर्माण शुरू कराया। हालांकि यह नाला गुलमोहर से राधा सिटी तक ही सीमित रह गया है।

उन्होंने कहा कि जब तक आगे नाला निर्माण पूरा कर एसटीपी के माध्यम से शोधित पानी का उचित निस्तारण मथुरा एस्केप में नहीं किया जाता, तब तक समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं और यदि शीघ्र नाला निर्माण नहीं हुआ तो आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।

इधर खामनी गांव में भी वर्षों से सड़क पर पानी बहना आम बात हो गई है, जिससे ग्रामीणों और राहगीरों को लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर समस्या के समाधान की मांग की है।