मनोज चौधरी। मथुरा।
ब्रज के मंदिरों में तिलक की आड़ में फल-फूल रहा है ‘बाल श्रम’ का काला धंधा;
दुनिया में धूमिल हो रही भारत की छवि
कान्हा की नगरी, जहां की हवाओं में प्रेम और करुणा का वास माना जाता है, आज वहीं मासूम बचपन चुपचाप घुट रहा है। जिसे हम आस्था का आंगन कहते हैं, वहां अब गरीबी और मजबूरी की आड़ में ‘संगठित बाल श्रम’ का एक भद्दा खेल खेला जा रहा है। बरसाना, नंदगांव, गोवर्धन, वृंदावन और गोकुल—इन पावन स्थलों पर 14 साल से कम उम्र के बच्चों के हाथों में खिलौने या किताबें नहीं, बल्कि तिलक की कटोरियां और सांचे थमा दिए गए हैं।
“राधे… तिलक लगा दूं?” – मासूमियत के पीछे छिपा अपराध

मथुरा के प्रमुख मंदिरों और परिक्रमा मार्गों पर यह नजारा आम है। नन्हे बच्चे श्रद्धालुओं को घेरकर कहते हैं— “राधे… तिलक लगा दूं, जो बने दे देना।” श्रद्धालु इसे भक्ति समझकर चंद रुपये थमा देते हैं, लेकिन वे यह नहीं जानते कि उनकी यह छोटी सी मदद इस अपराध को जीवित रख रही है। ये बच्चे स्कूल की बेंच पर बैठने के बजाय चिलचिलाती धूप और भारी भीड़ के बीच अपना भविष्य तिलक के रंगों में घोल रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनामी: विशेषज्ञों की चेतावनी
ब्रज की ये तस्वीरें अब केवल स्थानीय नहीं रहीं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत में बाल श्रम को लेकर ये तस्वीरें एक ‘भद्दी तस्वीर’ पेश कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक स्थलों पर खुलेआम बाल श्रम न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि भारतीय संस्कृति की उस मूल भावना पर भी प्रहार है जो बच्चों के संरक्षण की बात करती है।
प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: 12 बच्चे मुक्त, माता-पिता को नोटिस
इस गंभीर मुद्दे पर राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने कड़ा संज्ञान लिया है। ‘जस्टिस फॉर चिल्ड्रेन सोसायटी’ के सतीश चन्द्र शर्मा की शिकायत पर जिलाधिकारी और श्रम विभाग ने एक्शन लिया।
संयुक्त रेड:
श्रम विभाग, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), चाइल्ड लाइन और महिला कल्याण विभाग ने मिलकर बरसाना में बड़ी कार्रवाई की।
12 बाल श्रमिक रेस्क्यू:
अभियान के दौरान 12 बच्चों को तिलक लगाने के काम से मुक्त कराया गया।
सीडब्ल्यूसी (CWC) का फैसला: बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेश दीक्षित के निर्देशानुसार बच्चों को बाल संरक्षण गृह भेज दिया गया है।
“दुनिया में गलत संदेश जा रहा है, इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। पकड़े गए बच्चों के माता-पिता को नोटिस जारी किया गया है। यदि दोबारा बच्चों से श्रम कराया गया, तो सीधे मुकदमा दर्ज होगा।”
— एम.एल. पाल, सहायक श्रमायुक्त
मंदिर प्रबंधन और श्रद्धालुओं से अपील
प्रशासन ने ब्रज के सभी मंदिरों के प्रबंधन से सख्त अपील की है कि वे 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को टीका लगाने या अन्य किसी भी काम में न लगाएं। प्रशासन अब शिक्षा विभाग के साथ मिलकर इन बच्चों के स्कूलों में नामांकन और पुनर्वास की तैयारी कर रहा है।
: आस्था या जिम्मेदारी?
ब्रज की पहचान प्रेम और संवेदना से है। यदि इसी पावन भूमि पर बचपन मजदूरी की भेंट चढ़ रहा है, तो यह पूरे समाज के लिए चेतावनी है। अगली बार जब आप तिलक लगवाएं, तो सोचें—क्या आप आस्था का मान रख रहे हैं या एक बच्चे से उसका भविष्य छीन रहे हैं








