मनोज चौधरी, मथुरा
डिजिटल बिजली व्यवस्था की ओर मथुरा का कदम’
मथुरा में स्मार्ट मीटरों का शतक नहीं, सिस्टम का बदलाव पूरा हुआ
परंपरागत बिजली व्यवस्था से निकलकर डिजिटल और पारदर्शी सिस्टम की ओर मथुरा ने बड़ा कदम बढ़ा दिया है। शहर में एक लाख स्मार्ट मीटर लगने के साथ ही बिजली विभाग ने इसे केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि उपभोक्ता-केंद्रित सुधार के रूप में प्रस्तुत किया। इसी संदेश के साथ विद्युत कैंट कार्यालय पर आयोजन हुआ, जहां केक काटकर उपलब्धि का उत्सव मनाया गया और स्वास्थ्य शिविर के जरिए सामाजिक जिम्मेदारी भी निभाई गई।
कार्यक्रम में स्पष्ट किया गया कि स्मार्ट मीटर अब केवल रीडिंग लेने का उपकरण नहीं, बल्कि उपभोक्ता को खुद अपनी ऊर्जा खपत पर नियंत्रण देने वाला डिजिटल माध्यम है। ऊर्जावान ऐप के जरिए अब उपभोक्ता प्रतिदिन की खपत देख सकता है, जिससे अनावश्यक बिल और विवादों पर लगाम लगेगी।
एक लाखवां स्मार्ट मीटर औरंगाबाद क्षेत्र निवासी उपभोक्ता पवन भारद्वाज के यहां लगने पर उन्हें सम्मानित किया गया। यह सम्मान प्रतीक बना उस बदलाव का, जिसमें उपभोक्ता को व्यवस्था का सहभागी माना जा रहा है। जीएमआर कंपनी के प्रोजेक्ट हेड देवेंद्र वर्मा ने इस मौके पर मथुरा जोन के चीफ इंजीनियर राजीव गर्ग को स्मृति चिन्ह भेंट कर परियोजना में विभागीय सहयोग की सराहना की।
चीफ इंजीनियर राजीव गर्ग ने कहा कि आरडीएसएस योजना के तहत एडवांस मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से न केवल बिजली आपूर्ति मजबूत होगी, बल्कि लाइन लॉस और शिकायतों में भी कमी आएगी। उन्होंने इसे मथुरा के लिए “भविष्य की बिजली व्यवस्था” बताया।
कार्यक्रम के समानांतर जीएमआर की ओर से लगाए गए स्वास्थ्य शिविर ने आयोजन को सामाजिक सरोकार से भी जोड़ा। कैंट कार्यालय में लगे शिविर में 50 से अधिक बिजली कर्मियों और उपभोक्ताओं ने स्वास्थ्य जांच कराई और विशेषज्ञों से परामर्श लिया।
जोनल हेड शैलेंद्र त्रिपाठी, सर्किल इंचार्ज राजेंद्र गुल्हानी और इरफान बेग ने स्मार्ट मीटर के तकनीकी और व्यावहारिक लाभों की जानकारी दी। कार्यक्रम में अधीक्षण अभियंता शहरी मुदित तिवारी, एक्सईएन गौरव कुमार, साक्षी चौधरी सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
एक लाख स्मार्ट मीटर लगने के साथ मथुरा ने यह संकेत दे दिया है कि शहर अब केवल बिजली उपभोग नहीं करेगा, बल्कि स्मार्ट तरीके से बिजली प्रबंधन भी करेगा।








