शीतलहर के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने बुधवार को नया बस स्टैंड, मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन गेट नंबर–03 (धौली प्याऊ की ओर) तथा जिला चिकित्सालय मथुरा स्थित रेन बसेरों का निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य ठंड के मौसम में निराश्रितों, जरूरतमंदों और यात्रियों को समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराना रहा।
क्या किया गया? जिलाधिकारी ने रेन बसेरों में उपलब्ध व्यवस्थाओं का जायजा लिया और वहां ठहरे लोगों से बातचीत कर सुविधाओं की स्थिति जानी। उन्होंने मौके पर मौजूद निराश्रितों को कंबल भी वितरित किए।
कहां और कब? यह निरीक्षण 17 दिसंबर को मथुरा शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों और रेन बसेरों में किया गया, जहां सर्दी में बड़ी संख्या में लोग शरण लेते हैं।
क्यों जरूरी था? जिलाधिकारी ने बताया कि कोई भी व्यक्ति खुले में न सोए, यह प्रशासन की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से जनपद भर में रेन बसेरे स्थापित किए गए हैं और शीतलहर से बचाव के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं।
कैसी व्यवस्थाएं हैं? डीएम ने बताया कि सभी रेन बसेरों में अलाव व हीटर की पर्याप्त व्यवस्था है। साथ ही पेयजल (आरओ), बेड, रजाई, तकिया, कंबल, वाई-फाई, मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट तथा साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्यटक सुविधा केंद्रों पर भी रेन बसेरे बनाए गए हैं।
कैसे लागू हो रही योजना? जनपद की ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों और नगर पालिकाओं में रेन बसेरे संचालित हैं। डीएम ने जानकारी दी कि जिले में कुल 27 रेन बसेरे स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा 59 स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है। गोवर्धन तहसील में 13, महावन में 13, मांट में 10, छाता में 7 और सदर तहसील में 16 स्थानों पर अलाव जलाए जा रहे हैं।
जरूरतमंदों को राहत पहुंचाने के लिए सभी तहसीलों में कंबल वितरण भी लगातार किया जा रहा है। सदर में 1208, छाता में 1000, मांट में 1000, महावन में 1000 और गोवर्धन में 1000—कुल 5208 कंबल वितरण के लिए दिए गए हैं। साथ ही जनपद की सभी गौशालाओं में गौवंश को ठंड से बचाने के लिए अलाव, त्रिपाल, बोरी और शेड की व्यवस्था की गई है।
जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि प्रशासन निराश्रितों और जरूरतमंदों को हर संभव राहत देने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है और शीतलहर के दौरान व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जा रही है।