छह दिसंबर पर विशेष…सत्य दबता नहीं… उठकर खड़ा होता है श्रीकृष्ण जन्मभूमि अवश्य मुक्त होगी

मनोज चौधरी 

— महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट, अध्यक्ष: श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास

–पांच हजार वर्षों की पवित्र विरासत को उसके मूल स्वरूप में लौटाने के संकल्प पर बोले—

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट

“यह सिर्फ मुकदमा नहीं, सनातन धर्म के आत्मसम्मान की पुनर्स्थापना का समय है।”

महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट पिछले  वर्षों से श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए न्यायालय और जन-आंदोलन, दोनों मोर्चों पर अग्रिम पंक्ति में खड़े हैं। एक विशेष बातचीत में उन्होंने इतिहास, साक्ष्यों, जनसमर्थन और आगामी रणनीति को लेकर स्पष्ट, गंभीर और दृढ़ बातें कहीं।

उनके अनुसार, “लगभग पाँच हजार वर्ष पूर्व भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र राजा वज्रनाभ ने 13.37 एकड़ में भव्य जन्मभूमि मंदिर का निर्माण कराया था। बाद में चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने इसे विस्तार दिया। लेकिन गजनवी से लेकर औरंगजेब तक हुए आक्रमणों ने इस पावन धरा को बार-बार छलनी किया।”

“2020 में पहला वाद दायर किया—यहीं से निर्णायक संघर्ष शुरू हुआ”

नींब करोरी आश्रम में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट साथ में हैं पंडित श्यामानंद जी महाराज

वे बताते हैं कि दिसंबर 2020 में निचली अदालत में पहला वाद दायर किया गया था, जो अब हाईकोर्ट में लंबित है।

यह केवल कानूनी लड़ाई नहीं, सत्य की पुनर्स्थापना का मार्ग है। मूल गर्भगृह स्थल पर आज जो संरचना है, वह इतिहास के प्रत्यक्ष और अपरोक्ष साक्ष्यों के विपरीत खड़ी है।”

वैश्विक स्तर पर फैला आंदोलन

नवंबर 2024: अंतर्राष्ट्रीय धर्म संसद

जनवरी 2025: वैश्विक हस्ताक्षर अभियान — अब तक साढ़े सात करोड़ लोग समर्थन में हस्ताक्षर कर चुके

फरवरी 2025: महाकुंभ प्रयागराज महासंवाद

अगस्त 2025: चारों दिशाओं से यात्राएं; द्वारका व बद्रीधाम की यात्राएं मथुरा पहुंचीं

ब्रज चौरासी कोस यात्रा,

‘चलो गांव की ओर’ अभियान

अब तक साढ़े सात करोड़ लोगों ने अपने हस्ताक्षर कर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति का समर्थन दिया—अभियान विश्वभर में जारी।”

–साक्ष्य: मंदिर की आत्मा दीवारों से झांकती है

महेंद्र प्रताप सिंह कहते हैं,

मस्जिद की दीवारों पर आज भी कमल, शंख, गदा, चक्र जैसे पवित्र हिंदू प्रतीक स्पष्ट रूप से उकेरे हुए हैं। यह मंदिर होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है। मुगल इतिहासकारों ने भी मंदिर तोड़े जाने का विवरण अपनी पुस्तकों में लिखा है। हमने गहन अध्ययन के बाद सारे साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत कर दिए हैं

जामा मस्जिद केस

औरंगजेब द्वारा जन्मभूमि से भगवान के विग्रह को आगरा ले जाकर जामा मस्जिद की सीढ़ियों में चिनवाने का प्रकरण भी अब न्यायालय में विचाराधीन है।

विग्रह मथुरा वापस आएँगे—यह केवल आस्था का नहीं, ऐतिहासिक न्याय का प्रश्न है।

—धमकियाँ कई मिलीं, पर संकल्प नहीं डिगा।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर मथुरा

मेरा संघर्ष मंदिर निर्माण के पूर्ण होने तक जारी रहेगा।

महेंद्र प्रताप सिंह

-संतों का समर्थन और रणनीति पर मंथन

वे तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य, स्वामी गोविंद गिरी, धीरेन्द्र शास्त्री, अवधेशानंद गिरी, निश्चलानंद सरस्वती, प्रेमानंद जी महाराज, अनिरुद्धाचार्य, ज्ञानानंद जी महाराज सहित देश भर के प्रमुख संतों से मिल चुके हैं।

“सभी ने स्पष्ट कहा—यह संघर्ष धर्म की प्रतिष्ठा का संघर्ष है।

आंदोलन के उद्देश्य

मूल स्थल से अवैध संरचना हटाकर भव्य श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर पुनः निर्माण

पुरी शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती को श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के आंदोलन की जानकारी देते हुए श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट

सनातन धर्म को सुदृढ़ आधार देना

हिंदू समाज को उसका वास्तविक इतिहास याद दिलाना

–यह संघर्ष मेरा नहीं—करोड़ों हिंदुओं की इच्छा, आस्था और धैर्य का संकल्प है।

सत्य अंत में विजयी होगा और जन्मभूमि अवश्य मुक्त होगी।