यमुना के जलस्तर के नीचे आते ही उभर रही डरावनी तस्वीर

यमुना के जलस्तर के नीचे आते ही उभर रही डरावनी तस्वीर
करीब 45 हजार हेक्टेयर में डूबी कई करोड़ की फसल
रबी से पहले न मिला मुआवजा तो संकट में फंस जाएंगे हजारों किसान
– मानव और पशुओं में जानलेवा बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ी

वंदना शर्मा, मथुरा

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खतरनाक स्तर को पार करके यमुना पुनः अपनी सामान्य स्थिति की ओर बढ़ने लगी है। साथ ही साथ छाता, मांट और महावन तहसील तटवर्ती इलाकों में एक भयावह तस्वीर भी उभर कर सामने आने लगी है। 40 50 हेक्टेयर रकबा में खड़ी खरीफ की धान, बाजरा, तिलहन, दलहन और सब्जियों की फसलें डूब गई। एक दर्जन के करीब संपर्क ग्रामीण मार्ग क्षतिग्रत हो गए। सामान्य स्थित होने के बाद की विभीषिका का भी कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण, विधायक पूरन प्रकाश,राजेश चौधरी और जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह साथ अंदाजा लगा आए हैं। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में गंभीर

गांवों में ग्रामीणों के स्वास्थ्य का परीक्षण करते चिकित्सक

बीमारियों के फैलने से रोकने के लिए प्रशासन ने युद्ध स्तर पर कार्य आरंभ कर दिया है। स्वास्थ्य और पशु पालन विभाग की टीमों को गांवों में उतारा गया है। बाढ़ से प्रभावित किसानों के सर्वे भी कराया जा रहा है। ताकि रबी फसलों की बोआई से पहले मुआवजे बांटा जा सके।
इधर, नदी की जलधारा का कटान इस वार किस दिशा में बढ़ा है और भविष्य में यमुना की जलधारा से इन इलाकों को सुरक्षित रखने की कार्य योजना पर अधिकारियों ने मंथन भी शुरू कर दिया है। जनप्रतिनिधि भी गांवों की ओर बढ़ती यमुना की धारा को मोड़ने के लिए कराए जाने वाले कार्यों के प्रस्ताव भी तैयार कर रहे हैं।

नदी के जल स्तर में गिरावट आ गई है। प्रभावित क्षेत्रों में राशन सामग्री का आवश्यकतानुसार वितरण कराया जा रहा है। मानव और पशुओं में फैलने वाले संभावित बीमारियों पर नियंत्रण रखने चिकित्सक तैनात किए गए हैं। भविष्य में गांवों की तरफ नदी के बढ़ते कटान को रोकने के लिए भी कार्ययोजना बनाई जा रही।” चंद्रप्रकाश सिंह, जिलाधिकारी

आबादी क्षेत्र में भरा यमुना नदी का पानी

– 35 हजार हेक्टेयर में डूबी धान की फसल
– सबसे अधिक छाता तहसील, मांट और महावन में भी हुआ फसलों को हुआ नुकसान
-बाबूगढ़ और अकोस में हुआ सर्वाधिक कटान
-92 मील होकर टेड़ी मेड़ी नदी के बहने छाता और मांट तहसील में यमुना की जलधारा की दिशा बदलने की बड़ी आशंका

संभावित खतरे
– मलेरिया, पीलिया और पेट संबंधी बीमारी का
– पशुओं में खुरपका और गलघोंटू जैसी जानलेवा बीमारी का
पनप सकतीं हैं रंजिश : तटवर्ती क्षेत्रों में खेतों का नक्शा ही यमुना नदी की जलधारा में उलट पुलट कर दिया है। खेतों से पानी की निकासी होने के बाद मेडबंदी रंजिश का कारण भी बन सकती है। पूर्व में आई बाढ़ के बाद मांट और छाता थाना क्षेत्र में इस तरह के मामले सामने आए थे।