अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बुलंद किया आ गए हैं अवध बिहारी और अब आएंगे कृष्ण मुरारी का नारा
मथुरा
इन दिनों दुनिया में भगवान श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर चर्चा में हैं। हर हिंदू के जेहन में एक ही सवाल है कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का तो मंदिर बन गया। क्या मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण का ऐसा ही भव्य विशाल मंदिर उनके प्राकट्य स्थल (मूल गर्भ गृह) पर बन पाएगा।
हिंदुओं की इसी उम्मीद को साकार रूप देने का प्रण लेकर महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर “आ गए हैं अवध बिहारी और अब आएंगे कृष्ण मुरारी” के नारे को बुलंद करने का कार्य किया है। इस आंदोलन को मिल रहे अभूतपूर्व समर्थन से श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति का भी रास्ता शीघ्र साफ हो जाएगा।

ब्रज नंद नंदन श्री कृष्ण की लीलाओं पर गहन शोध करने के बाद मथुरा जिले के गांव अकबरपुर के मूल निवासी हाल निवासी वृंदावन महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने वर्ष 2020 में भगवान श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर की करीब ढाई एकड़ जमीन पर मंदिर को तोड़कर बनाई गई शाही ईदगाह मस्जिद को हटाकर वहां पुनः मंदिर निर्माण कराने की मांग को लेकर वह न्यायालय की शरण में गए। स्थानीय अदालत से आरंभ हुई कानूनी लड़ाई हाईकोर्ट इलाहाबाद में पहुंच गई। इस मुकदमा के वादी हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने साथ ही आगरा स्थित जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगे भगवान श्रीकृष्ण के विग्रहों को वापस मथुरा लाए जाने की मांग करते हुए न्यायालय में याचिका दायर की थी। दोनों मुकदमों को लड़ रहे महेंद्र प्रताप सिंह ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास का गठन करके अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मंदिर निर्माण के लिए अनुकूल वातावरण तैयार को एक आंदोलन भी खड़ा करने का कार्य किया।
श्री कृष्णजन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने बताया कि आंदोलन के शुरुआती चरण में देश विदेश के प्रमुख संत महंतों से भेंट वार्ता कर एक एजेंडा तैयार किया गया। नवम्बर 2024 को वृंदावन में बुलाई गई अंतर्राष्ट्रीय धर्म संसद में एजेंडा पर दुनिया भर से आए संतों ने अपनी मुहर लगा दी। जनवरी 2025 में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के मुख्य द्वार से भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य स्थल पर मंदिर निर्माण की मांग को लेकर एक हस्ताक्षर अभियान शुरू किया था। महाकुंभ में इसको अभूतपूर्व सफलता मिली । करीब छह करोड़ लोगों ने हस्ताक्षर करके न्यास के आंदोलन का समर्थन किया। फरवरी में महाकुंभ में महासंवाद का आयोजन किया गया। इसमें प्रमुख संतों ने हिस्सा लिया था। इधर देश के प्रमुख स्थलों पर हिंदू चेतना यात्राएं आरंभ कर दी गई। अप्रैल में द्वारिका से संत राजेश्वर जी महाराज के सानिध्य में एक यात्रा मथुरा आई। जून में बुलंदशहर के रामघाट से संत कांताचार्य जी के सानिध्य एक पैदल यात्रा मथुरा आई। इसके साथ ही महंत मधुवन दास की अगुवाई में ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग के गांवों में हिंदू चेतना यात्रा निकाली गई। जून के ही अंतिम सप्ताह में चलो गांव की ओर अभियान आरंभ किया गया, जो जारी है।
विधर्मी आज भी रच रहे हिंदुओं के खिलाफ कुचक्र
महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट कहते हैं, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गरीब, मजदूर, विधवा महिलाओं को प्रेम जाल में फंसाने की बहुस्तरीय योजनबद्ध साजिश का खुलासा होने की खबर लगभग हर दिन मिल रही है। बलरामपुर में गिरफ्तार किए गए इसके मास्टरमाइंड जलालुद्दीन उर्फ छांगुर ने पांच सौ करोड़ रुपए के विदेशी फंड से हिंदू धर्म पर तो हमला किया ही साथ ही साथ हिंदू महिलाओं को भी शिकार बनाया। वह कहते हैं कि विधर्मियों की साजिशों को नाकाम करने के लिए हिंदुओं को जागरूक करने के साथ ही साथ उनको संगठित करने का भी कार्य इन आंदोलनों के माध्यम से कर रहे हैं। “चलो गांव की ओर” अभियान के तहत चौपाल पर हिंदुओं को उनका इतिहास स्मरण कराया जा रहा है। उनको यह भी बताया जा रहा है कि विधर्मियों के कुचक्र में फंसने से बचने के लिए हिंदुओं को किन किन पहलुओं पर खास ध्यान देना है। हिंदुओं को किन किन क्षेत्रों में महारथ हासिल करनी होगी। तभी हम सब मिलकर विधर्मियों की साजिशों को विफल करने में सफल हो पाएंगे। यही सब हिंदुओं को गांव गांव जाकर समझाया जा रहा है। बुजुर्गों के अनुभव साझा कर युवा वर्ग को भी संगठन से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।
मुगलों ने लांघी थी क्रूरता की हद, चार बार तोड़ा था भगवान श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर
भगवान श्रीकृष्ण के परपोते राजा वज्रनाभ ने करीब पांच हजार वर्ष पूर्व मथुरा में अपने कुलदेवता भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य स्थल पर एक भव्य मंदिर बनवाया था। चौथी शताब्दी में चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने मंदिर को एक विशाल आकार दिया। अफगानिस्तान की गजनी प्रांत से सन् 1017 में आए क्रूर लुटेरे महमूद गजनवी ने मथुरा पर आक्रमण किया। भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर को तीन दिन टकटकी लगा कर निहारने वाले इस लुटेरे ने मंदिर ध्वस्त करने का फरमान जारी किया। 21 दिन तक कत्ल ए-आम करने के बाद दस हजार से अधिक हिंदू महिलाओं और 300 ऊंटों पर सोना चांदी लाद कर अपने साथ गजनी ले गया। सन् 1150 में कन्नौज राज्य के राजा विजयपाल सिंह देव ने मंदिर का पुनः निर्माण कराया। सन् 1351 में फिरोज शाह तुगलक ने मथुरा पर आक्रमण करके श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को ध्वस्त कर डाला। बृजवासियों ने परस्पर सहयोग से श्रीकृष्ण मंदिर को बनवाया, पर सन् 1488 में सिकंदर लोदी तो क्रूरता की हद को लांघ गया। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को तो तोड़ा ही साथ ही भगवान के विग्रहों को खंडित कर उन्हें यमुना नदी में फिंकवा दिया। कुछेक विग्रह कसाइयों को उनपर मांस रखकर काटने और तोलने के दे दिए। यमुना स्नान, पूजा अर्चना, चोटी रखने पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही साथ हिंदुओं पर जजिया कर लगा दिया। वर्ष 1618 में ओरछा के राजा वीर सिंह बुंदेला ने पुनः भव्य मंदिर का निर्माण भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य स्थल पर कराया, मगर 1670 में मथुरा पर आक्रांता औरंगजेब ने हमला कर भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर को ध्वस्त तोड़कर वहां एक मस्जिद का निर्माण करवा दिया। भगवान के विग्रहों को यहां से ले जाकर औरंगजेब ने आगरा स्थित जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगवा दिया। जो आज भी लगे हुए हैं।
लेखक
पत्रकार मनोज चौधरी








