किसानों की तरक्की का राज खेती का के मॉडल

अनुज गुप्ता :

केंद्र और राज्य सरकार किसानों की तरक्की के लिए संकल्पबद्ध है। और कृषि विभाग की किसानों को इसके लिए नवीनतम तकनीक से खेती करने की जानकारी रहा है।  उर्वरकों पर खर्च की जा रही सब्सिडी का बोझ कम कर। प्राकृतिक खेती को बढ़वा देने की दिशा में सरकार कदम बढ़ा रही है। इसी कड़ी में पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्व विद्यालय एवं गो अनुसन्धान संस्थान में अपने बकरी फार्म पर एक मॉडल विकसित किया है। जो छोटी जोत के किसानों के लिए तरक्की की राह को आसान करने में मील का पत्थर सिद्ध होगा।

एक एकड़ से भी कम भूमि पर एक साथ मछली, बकरी और मुर्गी पालन किया जा रहा है। इसके साथ ही बकरियों के चारे के लिए एक हिस्से में सहजन उगाई जा रही है। बकरियों की बीट से मुर्गी को चारा मिल रहा है। साथ ही मेंगनी से खाद बनाया जा रहा है। खाद का उपयोग सहजन की खेती में किया जा जा रहा है। इससे किसान को दोहरा लाभ मिल रहा है। एक मुर्गी के दाना बच रहा है। दूसरा चारा उगाने में उर्वरक की पर लागत नहीं लगानी पड़ रही है। किनारे उगाई जा रही सब्जी में भी खाद पर कोई लागत नही लगानी पड़ रही है। मुर्गी की बीट से मछली को खाना मिल रहा है। बकरी फार्म के प्रभारी डॉक्टर मुकुल आनन्द का कहना है कि इस मॉडल को देखने के लिए देश भर से किसान आ रहे है। एक तरह से यह मॉडल जीरो लागत पर खेती और उस पर आधारित उद्योग के लिए तैयार किया गया है।